खुद को मोटिवेट कैसे करें ?(how to motivate yourself)

  नमस्कार दोस्तों, मैं आज फिर एक नया टॉपिक लेकर आप लोगों के सामने उपस्थित हुआ हूं, यह आज के युवा में एक बहुत ही कॉमन समस्या है कि खुद को motivate कैसे करें? और अगर motivate हो भी जाते हैं, तो अधिक समय तक कैसे रहें ? 

हम लोगों की यही शिकायत रहती है कि लक्ष्य  प्राप्त नहीं कर पाते क्या करें ऐसा कि अपने लक्ष्य के प्रति जागरूक रहें? हमेशा मोटिवेट कैसे रहें ?किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती और न जाने क्या-क्या !

ऐसे लोगों से सबसे पहले यही कहना चाहूंगा  एक क्षण के लिए रुको तो सही। सोचो तो क्या चाहते हो किसके लिए पागल हुए जा रहे हो और जो चाहते हो क्या वह वास्तव में चाहते हो? या इस दुनिया ने तुम्हारे दिमाग में भर दिया है,

 क्योंकि ज्यादातर 99 परसेंट चीजें तो तुम्हारे दिमाग में इस दुनिया द्वारा ही डाली गई है और काफी हद तक अधिकतर लोगों के लक्ष्य दुनिया द्वारा ही निर्णय लिया जाता है।

 अब आती है बात मोटिवेशन की तो मैं सब भाई लोगों को एक ही सलाह देना चाहूंगा। कृपया इन दो कौड़ी के  झोलाछाप मोटबेटर गुरुओं से बचें, यह मोटिवेशन की आड़ में आप लोगों के दिमाग में जहर गोल रहे हैं।

मोटिवेशन की जरूरत उन्हीं लोगों को होती है जिनका लक्ष्य उनका खुद का नहीं होता है, उन्हें अपने लक्ष्य का ही याद नहीं रहता। क्योंकि वह उनका खुद का होता नहीं है,तो उन्हें बार-बार मोटिवेट होकर खुद को यह भरोसा दिलाना होता है, की वह कोई भी काम कर सकते हैं और यदि अगर आपका लक्ष्य वास्तव में आपका है तो आपको मोटिवेशन की कोई आवश्यकता ही नहीं होगी, तो कृपया मोटिवेशन की वजह लक्ष्य निर्धारित करने पर ज्यादा ध्यान दें।जीवन में लक्ष्य ऐसा होना चाहिए की लगे, जब तक लक्ष्य पूरा नहीं कर लेंगे तब तक तो जीवन ही व्यर्थ है अंदर से ऐसा भाव आना चाहिए आहा अब मिला कुछ ऐसा जो पाने लायक है, और तब तो यह किसी भी कीमत पर चाहिए इसके बिना तो जिंदगी अधूरी है ।जब अंदर से किसी चीज को लेकर ऐसा भाव आने के लिए तो समझ जाना चाहिए। कि हां जिंदगी का लक्ष्य मिल गया है।तो फिर अगर ऐसे लक्ष्य के लिए आप जिंदगी भी खफा देंगे तो भी कम है,और फिर शायद ही कभी होगा कि आप अपने लक्ष्य से भ्रमित हो।हां अगर कभी ऐसा हो भी जाता है कि आप अपने लक्ष्य से पथ भ्रमित हो जाए,तो उसके लिए आपको ज्ञान की जरूरत होती है ना की मोटिवेशन की।

उदाहरण के लिए "महाभारत में जब अर्जुन  पथ भ्रमित हुआ था, तो भगवान कृष्ण ने उसे गीता का ज्ञान दिया था। अगर भगवान कृष्ण आज कल के मोटी वेटर जैसे होते, तो वह कहते-लगे रहो अर्जुन तुम यह कर सकते हो एक न एक दिन तो यह जरूर कर लोगे तुम ही हो जो कर सकते हो और पता नहीं क्या-क्या, तो शायद ही पांडव युद्ध जीत  पाते।" हां शकुनी जरूर कहता होगा, उसका परिणाम आप लोग  भली-भांति जानते हैं।कहने का आशय यही है की समझदार बनो।लोगों के कहे अनुसार मत चलो। अपने दिमाग का इस्तेमाल करो,मैं यह नहीं कहता कि तुम्हें सब कुछ पता है, हर किसी व्यक्ति को सलाह की आवश्यकता होती है, आपको भी होगी तो सबसे पहले  गीता पढ़ो, अध्यात्मिक बनो। 

अगर आप गीता पढ़ मात्र लेते हो तो आपकी जीवन की अधिकतम समस्याओं का हल तो यूं ही हो जाएगा।थोड़ी बहुत समझ ले लेते हो और जिंदगी में उतार लेते हो।तो आप दुनिया के सफल और खुश लोगों में से एक हो जाओगे।

 सबसे पहले तो यह देखो कि जो आप चाहते हो,और वह वास्तव में आप ही चाहते हो या एक इच्छा मात्र है, जो किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा आपके जेहन में डाली गई है। ऐसी चीजों के प्रति काफी सतर्क रहो ।

बहुत सारे मां बाप अपने बच्चों को गीता इसलिए नहीं पढ़ने देते हैं,कि कहीं उनका बच्चा सन्यासी ना हो जाए। तो डरने की कोई जरूरत नहीं है ।अर्जुन का मन तो दुनिया से बिल्कुल विरक्त हो चुका था, वह भाई सगे संबंधियों का विरोध करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, भीख मांग कर रोटी खा सकता था। ऐसे समय भगवान कृष्ण ने उसे गीता के उपदेश दिए थे, तत्पश्चात उसने युद्ध जीतकर राजर्शी जीवन बिताया था इसलिए किसी के मन में यह संशय  हो तो कृपया उसे मिटा दें और बिना किसी डर के अपने बच्चों को गीता और अन्य संस्कृतिक किताबें पढ़ने के लिए जागरूक करें।आज के युग में और मिडिल क्लास के लोग हो तो सब भेंडचाल में लगे हुए हैं।

अतः बहुत ही सावधानी से अपने लक्ष्य बनाएं, जब लक्ष्य वास्तव में आपके होंगे,तो आपको उन्हें पूरा करने के लिए किसी बाहरी मोटिवेशन की या मोटिवेटर गुरुओं की आवश्यकता नहीं होगी।

धन्यवाद अगर पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट करके बताएं। मैं अभी यहां नया हूं कृपया सपोर्ट करें, धन्यवाद आगे भी ऐसे ही जीवन मार्गदर्शक जानकारी पाने के लिए फालो करें।

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