मुक्केबाज।



 

 यह कहानी  कल्पना पर आधारित है ,इसका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है। कृपया इसमें दिखाए गए नाम स्थान को वास्तविकता से ना जोड़ें  ।तो आइए शुरू करते हैं 




:-यह कहानी उत्तर प्रदेश राज्य के  फर्रुखाबाद जिले के छोटे से कस्बे राजपुर की है। उन दिनों राजपुर में मुक्केबाजी का बहुत ही ज्यादा ट्रेंड चल रहा था राजपुर के प्रत्येक घर से हर नौजवान मुक्केबाज बनना चाहता था तथा बहुत ही ज्यादा लोगों की इच्छा उस समय  पूरी भी हो रही थी।


           लेकिन वाकई में समस्या तो वहां पर यह थी कि वहां बहुत ज्यादा मुक्केबाजी सिखाने वाले गुरु अर्थात कोच नहीं थे पूरे जिले में केवल रामधारीसिंह नाम के एक व्यक्ति थे जो केवल मुक्केबाजी ही नहीं सिखाते थे बल्कि उस क्षेत्र में उनका बहुत ही दबदबा था उनका कहा गांव में कोई व्यक्ति टाल नहीं सकता था दूसरे शब्दों में कहें तो उनका राजनीति में भी अच्छा खासा स्थान था। 



   प्रकाश त्रिपाठी भी उसी गांव में एक छोटे से गरीब परिवार में रहने वाला एक शख्स था जो मुक्केबाजी सीखना चाहता था और एक  उम्मीद के साथ ठाकुर साहब के पास आया था कि  ठाकुर साहब उसको मुक्केबाजी सिखाएंगे ।


ठाकुर साहब मुक्केबाजी सीखने वाले लोगों को अपने घर के बाहर झोपड़ी में रखा करते थे वहां उन्होंने कई झोपड़ियां बना रखी थी जहां पर यह मुक्केबाजी सीखने वाले लोग रहा करते थे और उनके लिए काम धंधा किया करते थे तथा पैसा कमाया करते थे उसी पैसे से अपना गुजर-बसर किया करते थे ।


 प्रकाश को यहां आए हुए एक महीना हो चला था लेकिन कभी उसके गुरु ने उसे कोई भी मुक्केबाजी का दांव पेज नहीं सिखाया था बल्कि वह किसी भी व्यक्ति को मुक्केबाजी का दांव पेच नहीं सिखाते थे उल्टा उन लोगों से अपना काम लिया करते थे उन लोगों से घर का राशन व घर के सारे काम कराना अर्थात अपना स्वार्थ सिद्ध किया करते थे और जब कोई व्यक्ति उनकी बात नहीं मानता था या फिर कभी उनसे जिरह करता तो बे अपनी ताकत से उसका मुंह बंद कर दिया करते थे ।


एक दिन जब प्रकाश  उनके  घर में राशन का सामान रखने जा रहा  था तो रेशमा नाम की लड़की (जो कि ठाकुर साहब की भतीजी थी )को उसने देखा रेशमा गूंगी थी वह बोल नहीं सकती थी लेकिन आंखों ही आंखों में दोनों लोग एक दूसरे को पसंद करने लगे प्रकाश को इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी वह तो बहुत जल्द उससे  शादी करना चाहता था।


 धीरे-धीरे प्रकाश को इस बात का पता चला कि उसके गुरु  उनका  नौकरों की तरह उपयोग कर रहे हैं तो एक दिन जब उससे रहा न गया तो उसने उनसे कहा कि गुरु जी आप हमें कोई मुक्केबाजी तो सिखा नहीं रहे  है उल्टा आप हमसे  अपनी सेवा और कराते हैं हम  यहां मुक्केबाजी  सीखने के लिए आए हैं आपके नौकर नहीं है, बस इतना सुनना ही था कि रामधारी को गुस्सा आ गया उसने प्रकाश पर हाथ चला दिया। गर्म  खून था प्रकाश का। उससे  बर्दाश्त नहीं हुआ और जड़ दिया एक मुक्का रामधारी के मुंह पर।

 रामधारी वहीं पर बेहाल होकर गिर पड़े और उनके मुंह से खून की धार निकल आई प्रकाश वहां से भाग निकला। रामधारी के बाकी जो चेले थे वह प्रकाश के पीछे पीछे भाग दिए भागते भागते प्रकाश बेहाल हो गया और उनके चेलों द्वारा पकड़ लिया गया और गुरु जी के सामने प्रस्तुत किया गया गुरुजी ने उसकी बहुत मार लगाई। 



 उसका शरीर का अंग अंग फोड़ दिया गया उसे शरीर से बुरी तरह खून निकलने लगा तो गुरुजी ने उसे छोड़ दिया और कहा कि आज के बाद कुछ भी हो जाए चाहे मैं तुम्हें मुक्केबाजी तो नहीं खेलने दूंगा देखता हूं किस में ताकत है जो तुम्हें मुक्के बाजी खिला लेता है और इतना कहकर उसे अपनी हवेली से बाहर फेंक दिया।                                             जब प्रकाश अपने घर पर पहुंचा और जब उसे होश आया तू वह समझ नहीं पा रहा था कि अब वह क्या करें क्योंकि पूरे फर्रुखाबाद जिले में केवल मुक्केबाज सिखाने वाला एक ही गुरु था जिससे कि उसकी जब लड़ाई हो गई थी और वह उससे बदला भी लेना चाहता था इसलिए उसके पास तो सीखने के लिए जा नहीं सकता था लेकिन वह मुक्केबाजी से बहुत प्यार भी करता था और इंटरनेशनल लेवल पर मुक्केबाजी खेल कर अपने देश का नाम भी रोशन करना चाहता था और मुक्केबाजी के अलावा उसका किसी चीज में मन भी नहीं लगता था दूसरे शब्दों में बोले तो मुक्केबाजी उसका जीवन था लेकिन यहां तो कोई उसे सिखाने वाला ही नहीं था वह छोटी मोटी थोड़ी बहुत जो भी मुक्केबाजी जानता था उससे तो  बड़े-बड़े मुक्केबाजों को हरा नहीं सकता था।




           - उधर रेशमा के परिवार वालों से उस पर बहुत दबाव आ रहा था शादी करने के लिए लेकिन यहां  तो प्रकाश बिल्कुल ही बेरोजगार था वह कोई काम धंधा नहीं कर रहा था रेशमा किसी तरह अपने परिवार समझाती रहती थी ।


प्रकाश की जिला स्तर पर मुक्केबाजी की प्रतियोगिता होने में अब मात्र 6 महीने का समय बचा था और उसे कोई अच्छा मुक्केबाज गुरु नहीं मिल पा रहा था बहुत ही ढूंढने के बाद किसी ने उसे बताया की बरेली जिले में शंकर प्रसाद नाम की एक व्यक्ति रहते हैं  वह किसी कारण से प्रदेश लेवल पर मुक्केबाजी जीतने के बाद भी आगे मुक्केबाजी नहीं खेल सके थे प्रकाश सीधा बरेली शहर पहुंचा और उसने आपबीती  शंकर प्रसाद जी को सुना दी।


 शंकर प्रसाद ने कहा कि वह उसकी सहायता अवश्य करेंगे शायद उन्हें  प्रकाश में अपनापन  सा नजर आया था लेकिन प्रकाश को इसके बदले बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।

 प्रकाश  को तो किसी भी कीमत पर रेशमा से शादी करने का जुनून सवार था और फिर उसे अपने देश का नाम भी तो रोशन करना था। लग गया जी जान से और उसकी और शंकर प्रसाद जी की मेहनत रंग लाई ।

जिला स्तर पर तो वह प्रतियोगिता जीत गया इसके पश्चात उसे रेलवे में एक छोटी सी साधारण नौकरी पर रख लिया गया नौकरी मिलने के सीधे बाद प्रकाश रेशमा के घर उसका हाथ मांगने गया। जब यह बात रामधारी सिंह को पता चली तो आग बबूला हो गया उसने तुरंत प्रकाश से मना कर दिया ।

लेकिन रेशमा के पिता रामधारी थोड़ी ना  थे।  रेशमा के पिता ने रामधारी के मना करने के बावजूद भी प्रकाश से उसका विवाह कर दिया। रेशमा के पिता ने अपनी जिंदगी में पहली बार कोई निर्णय अपनी मर्जी से लिया था।




 रामधारी ने रेशमा,उसके परिवार से, कोच शंकर प्रसाद से और  प्रकाश से बदला लेने का निर्णय कर लिया ।

उन्होंने  रेशमा  के माता पिता को घर से बाहर निकाल दिया उनकी नौकरी भी छीन ली और प्रकाश पर बहुत ज्यादा रेलवे की तरफ से काम का दबाव बड़वा दिया जिससे कि वह आगे की मुक्केबाजी की तैयारी ना कर सके रेशमा की माता पिता रेशमा की नानी के यहां जाकर रहने लगे और प्रकाश ने किसी तरह दोबारा अपनी तैयारी शुरू की जब रामधारी को पता चला तो उसके  क्रोध का ठिकाना ना रहा।


 एक दिन जब  प्रकाश  शंकर प्रसाद के साथ उनके घर पर खाना खाने के लिए गया था तो वहां पर कुछ गुंडे उसने भेजें और शंकर प्रसाद को और प्रकाश को उन लोगों ने  वहीं पर मार कर अधमरा कर दिया अस्पताल में पहुंचने के बाद  प्रकाश तो जीवित रहेंगे लेकिन उसके गुरु शंकर प्रसाद  और अधिक समय तक जीवित न रह सके और वह स्वर्ग सिधार गए अपने गुरु की मौत से प्रकाश को बहुत गहरा धक्का लगा  और उसने किसी भी कीमत पर  रामधारी से बदला लेने का निर्णय लिया।

इधर रामधारी ने  रेशमा को उसके माता पिता सहित अगवा कर  लिया रामधारी ने रेशमा के पिता को मार डाला और रेशमा की मां को धमकी दी अगर रेशमा ने कुछ मुक्केबाज से तलाक नहीं ली तो यही हसरत रेशमा और उसकी मां का भी होगा इसके लिए उसने उन्हें 1 महीने का वक्त दिया और उसने उन लोगों को शहर से दूर एक सुनसान जगह पर एक हवेली में बंद कर दिया था हवेली के चारों तरफ बहुत ही कड़ा पहरा था।



 जब प्रकाश को इस बारे में पता चला कि उसकी पत्नी को अगवा कर लिया गया है तो वह तो पागल हो गया वह चारों तरफ अपनी पत्नी को इधर-उधर ढूंढता फिर रहा था पुलिस उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं थी क्योंकि पुलिस और प्रशासन को तो रामधारी ने पहले ही खरीद रखा था।


 अब प्रकाश के पास अपने गुरु और अपनी पत्नी तथा अपने ससुर का बदला लेने का केवल एक ही तरीका था कि वह स्टेट लेवल पर चैंपियनशिप को जीते और सारे लोगों से सरकार के समक्ष अपनी बात रखें और रामधारी जैसे लोगों का पर्दाफाश करें तभी उसकी कुछ मदद हो सकती थी क्योंकि अभी तो कोई उसकी बात सुनने तक को तैयार नहीं था वह पूरे जोरों शोरों से मुक्केबाजी की तैयारी में लग जाता है आखिर वह दिन भी आ जाता है कि जब उसको मुक्केबाजी की प्रतियोगिता खेलने के लिए जाना  ।


सभी प्रतियोगी उस जगह पर पहुंच जाते हैं शाम को ही पहुंच जाते हैं अभी मुक्केबाजी की प्रतियोगिता शुरूहोने में पूरी रात बाकी है तभी रेशमा और उसकी मां हवेली से कुछ समय के लिए बाहर निकलने में कामयाब हो जाते  हैं वह सीधे जाकर सबसे पहले प्रकाश को फोन करते हैं और उसे बताते हैं कि किस तरह रामधारी ने उसे और रेशमा को वहां हवेली में कैद कर रखा है वह उन लोगों को आकर बचा ले प्रकाश को जैसे ही पता चलता है वह रात को ही वहां से निकल पड़ता है और बहुत ही तकलीफ मुश्किलों के बाद लड़ते झगड़ते और उन सभी लोगों को मारते पीटते हुए अपनी पत्नी को और अपनी सास को बचाने में कामयाब हो जाता है लेकिन इस दौरान प्रकाश को भी बहुत चोटें आई हैं जो वह अपनी पत्नी को लेकर वापस लौट रहा होता है तो रास्ते में उसका सामना रामधारी से होता है इस बार वह रामधारी को भी नहीं छोड़ता है और मुंह से मारकर उनका भी मुंह फोड़ देता है जब वह शाम को प्रतियोगिता स्थान पर सुबह को पहुंचता है तुसी यह कहकर प्रतियोगिता खेलने से मना कर दिया जाता है कि उसके शरीर में चोटें लगी है जिसकी वजह से वह प्रतियोगिता नहीं खेल सकता है अगर रामधारी हां कह दे तो उसे प्रतियोगिता में शामिल कर लिया जाएगा वह रामधारी के पास जाता है रामधारी मुंह पर पट्टी बांधे हुए गाड़ी में बैठे हैं रामधारी उसको अपने पास बुला कर कहते हैं अगर जो बात कल शाम को हम लोगों के बीच जो घटना घटित हुई थी तुम उसके बारे में किसी को नहीं बताओगे और आज प्रतियोगिता खेलने के बाद भविष्य में फिर कभी प्रतियोगिता नहीं खेलोगे तो मैं प्रतियोगिता के लिए हां कह सकता हूं अन्यथा मैं किसी भी कीमत पर हां नहीं कहूंगा वह अभी भी यह चाहते हैं कि जब प्रकाश भविष्य में कोई प्रतियोगिता नहीं खेलेगा तो लोगों को लगेगा कि रामधारी ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी जिससे कि रामधारी का जलवा कायम रहेगा प्रकाश यह बात मानने के लिए तैयार हो जाता है वह योग्य एक योजना बनाता है कि वह मुक्केबाजी तो खेलेगा परंतु जीतेगा नहीं जिससे कि वह पूरी जिंदगी अपने गुरु शंकर प्रसाद की तरफ बेइज्जत होकर नहीं काटेगा जिसके पीछे का कारण यही रामधारी सिंह  थे।


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