कम्युनिकेशन स्किल्स कैसे डिवेलप करें?(how to devlope communication skills ?)

 नमस्कार दोस्तों ,मैं आज लेकर आया हूं आप लोगों के सामने नया टॉपिक ।जो जाने अनजाने में ही सही लेकिन हर व्यक्ति की समस्या होती है, कि ठीक तरह से बात कैसे करें।और भी बहुत सारे सवाल दिमाग में उठते रहते हैं, जैसे-

 लोगों को अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स  से इंप्रेस कैसे करें? 

क्या मैं समाज में सही तरीके से बात कर पा रहा हूं ?

कभी-कभी तो बात करते समय बिल्कुल ब्लैंक हो जाते हैं समझ में नहीं आता क्या बोले?

 तो चिंता करने के बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि मैं यहां आज हाजिर हुआ हूं आपके सारे सवालों के जवाब लेकर। और इस बात की गारंटी लेता हूं, कि अगर आपने मेरी बातों को सही से  फॉलो किया तो आपको आगे कभी जिंदगी में अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स की वजह से तो शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। आप भी समाज में अपनी एक  सम्मानित जगह बना पाएंगे तो शुरू करते हैं😎- 

 कहा जाता है कि हर व्यक्ति अपनी जबान के पीछे छुपा होता है ,अगर आप किसी व्यक्ति को अच्छी तरह जानना चाहते हो, तो उसे बोलने दो । लेकिन इसके साथ साथ यह बात भी बिल्कुल सही है की आपके व्यक्तित्व का पता आपके बातचीत करने के तरीके से ही लगता है ।अगर आप अपने कम्युनिकेशन स्किल्स को काफी बेहतर कर लेते हैं।

तो आप लोगों से अपना मनचाहा काम भी करवा सकते हैं दूसरे शब्दों में बोले लोगों से अपनी बात भी मनवा सकते हैं।


  आपने  गांधीजी, सुभाष चंद्र बोस ,भगत सिंह और भी अन्य बड़े महान नेताओं के बारे में सुना होगा। जिनके एक इशारे पर लोग जान देने के लिए तैयार हो जाते थे, इसका कारण यह तो था ही कि उन्होंने उन लोगों के लिए बड़े-बड़े त्याग बलिदान दिए हैं,साथ ही साथ  उन लोगों में एक चीज कॉमन थी, वही बात करने का तरीका।

उनके एक भाषण से लोगों में स्वाभिमान की लहर दौड़ जाती थी।जबकि वे लोग तो उनमें से प्रत्येक को जानते भी नहीं ,फिर भी लोग उनके लिए जान देने को तैयार होते हैं।

इसके पीछे का मुख्य कारण था उन लोगों के बात करने का तरीका।

 तो इससे एक बात तो पता चलती है, कि कम्युनिकेशन स्किल्स का महत्व केवल इतना ही नहीं है की आप लोगों से सही तरीके से बात कर सकते हैं, बल्कि यह आपको सफल बनने में बहुत सहायता करती है।मैंने कम्युनिकेशन स्किल्स के बढ़ाने के तरीकों को कुछ भागों में बांट दिया है जिसमें हम प्रत्येक भाग को एक-एक करके डिसकस करेंगे। 

  Confidence आत्मविश्वास- यह चीज तो ऐसी है कि जिसके बिना जिंदगी बेकार है, कॉन्फिडेंस तो आपके अंदर होना ही चाहिए ।हां मगर ओवरकॉन्फिडेंस  भी नहीं 😁।

आत्मविश्वास की बात यह है कि जब आप किसी से बात करते हैं तो कई बार क्या होता है कि सामने वाला व्यक्ति आप पर हावी होने का प्रयास करता है और बहुत से बातों के जाल  फेकता है ।वह आपसे ऐसी बातें कहता है ,जिससे आपको खुद पर शक होने लगे। आप उसकी बातों को सच मानकर उनमें फंस जाते हैं और अपने आप को  नीचा अनुभव करने लगते है, यही वह  स्किल होती है जो एक राजा और नौकर में अंतर करती है। 

for example अगर आप कोई गलत बात भी कहते हैं और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ कहते हैं तो कई बार उसे सही मान लिया जाता है। और कई बार आप सही होते हैं लेकिन आप में आत्मविश्वास नहीं होता है तो आपकी बात दब जाती है। इसलिए आत्मविश्वास बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है ।(अगर आप कहेंगे तो मैं आत्मविश्वास बढ़ाने के  तरीकों के ऊपर भी एक ब्लॉग बना दूंगा।)तो मैं बता रहा था आप उसकी बातों के जाल में फंस जाते हैं और अपने आप को हीन  समझने की गलती कर देते हैं ।यहीं से सारा खेल शुरू होता है,आपका दिमाग भी काम करना बंद कर देता है और आप पूर्ण रुप से सामने वाले आदमी के बस में हो जाते हैं। इलाज यही है की किसी आदमी के कहने पर खुद की काबिलियत पर शक ना करें सामने वाला व्यक्ति आपको आपसे बेहतर कभी नहीं जान सकता ।खुद पर विश्वास बनाए रखें तो आप चीजों को अच्छी तरह से मैनेज कर पाएंगे।

Sign language मूक भाषा- यह कम्युनिकेशन स्टार्ट करने की फर्स्ट स्टेप है,इस बात को  एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं,

 जैसे मान लीजिए आपको किसी व्यक्ति  से कोई सहायता चाहिए है, और आप उसकी तरफ देखते समय ऐसे घूर कर रहे हैं जैसे कि आप उसका अभी खून कर देंगे या उसने पता नहीं आपका कौन सा काम बिगाड़ दिया और अचानक जाकर आप उससे बहुत प्रेम से बात करने लगे, तो  यह बहुत ही अजीब लगेगा यह कोई मजाक की बात नहीं है। आपको पता नहीं  होगा लेकिन अधिकतर लोगों के साथ ऐसा ही होता है। वह लोग अंदर से तो  बात करना चाहते हैं  और खुश भी होते हैं  लेकिन  अनजाने में ही सही। चेहरा और  बॉडी लैंग्वेज ऐसा बनाए रखे होते हैं, जैसे दुनिया का सारा दुख इन्हीं को मिला हो। यह तो साधारण सी बात है आप चाहे किसी व्यक्ति से  बात करने के लिए कितने भी उत्सुक हो लेकिन अगर आपके चेहरे  पर वह भाव नहीं है तो कोई फायदा नहीं। क्योंकि सामने वाला व्यक्ति अंतर्यामी तो नहीं है, जो आपके मन की बात जान लेगा। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है अपने चेहरे और  body language को ठीक रखें। जब आप किसी से मिलते हैं तो उससे हल्का सा मुस्करा कर मिले, उसकी आंखों में भी देख सकते हैं ऐसा भी नहीं कि आप उसे घूरने लगे मतलब  सब कुछ नॉर्मल लगना चाहिए।

Be tough गंभीरता-  प्रत्येक व्यक्ति को अपने  व्यक्तित्व में गंभीरता लानी चाहिए। जो व्यक्ति गंभीर नहीं होता है,बातों को गंभीरता से नहीं लेता है बात बात पर हंसता है,उस व्यक्ति की कोई इज्जत नहीं करता ना ही उसके परिवार वाले ना ही उसके मित्र। अतः हमें अपने स्वभाव में गंभीरता लानी चाहिए यह भी कम्युनिकेशन की दृष्टि से एक बहुत ही महत्वपूर्ण  बिंदु है। इस बात को आप उदाहरण के जरिए समझ सकते हैं, कि हम सबके घर में या फ्रेंड सर्कल में कोई न कोई व्यक्ति ऐसा जरूर होता है या दोस्त ऐसा जरूर होता है। जिसकी कोई इज्जत नहीं करता,जो हमेशा परेशान रहता है जिसे लोग हमेशा छेड़ते रहते हैं, जिसकी बात की कोई वैल्यू नहीं होती इस सब का कारण यही होता है कि उसके स्वभाव में गंभीरता नहीं होती।

Good listener श्रोता- अगर आप चाहते हैं कि-

सामने वाला व्यक्ति आपसे बात करें, 

आपकी बातों को समझे, 

आप की कदर करें।

 तो आपको भी उसके प्रति वैसा ही होना होगा । हम लोगों को बोलने वालों से ज्यादा सुनने वाले लोग ज्यादा पसंद होते हैं। आपको भी सामने वाले को समझना होगा। आप में से हर एक के घर में कोई बड़ा बुजुर्ग होगा, यह कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा वह हमेशा अपनी ही बात करता रहता होगा किसी दूसरे की सुनना बिल्कुल पसंद नहीं करता होगा क्या आप उसके पास बैठना पसंद करते हैं या उसकी बातें सुनना पसंद करते हैं ।नहीं करते होंगे,

क्योंकि हम में से हर एक व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति की तलाश होती है, जो  हमारी भावनाओं को समझने की कोशिश करे, ना कि अपनी ही बातें करता रहे तो आपको यह समझना बेहद जरूरी है, की आपको अच्छे  कम्युनिकेटर बनने के लिए एक अच्छा  श्रोता  बनना बहुत जरूरी है। आपको बहुत ही कम बात करनी चाहिए लेकिन जब जरूरत पड़े तो चुप भी नहीं रहना चाहिए।

Understanding-एक बात तो हम सभी जानते हैं की तारीफ सुनना हर किसी को पसंद होता है। हर व्यक्ति उम्मीद करता है कि सामने वाला मेरी तारीफ करें,तो यही भी कम्युनिकेशन  के नजरिए से बहुत ही इंपॉर्टेंट पॉइंट बनता है।आपको सामने वाले की बेझिझक दिल खोलकर तारीफ करनी चाहिए।

कई बार हम यह भी सोचते हैं कि कहीं सामने वाले के भाव ना बढ़ जाएं, कहीं वह हमें इज्जत देना न कम कर दे ।तो आपको चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ नहीं होगा।

बहुत बार हम लोग कुछ ज्यादा अच्छे बनने की कोशिश में सामने वाले की बेज्जती कर देते हैं, और फिर एक्सक्यूज क्या देते हैं? कि हम तो  दिल के साफ है। अब  दिल चीर के कौन देखेगा कि साफ है कि गंदे हैं, इसलिए इस बात से बहुत बचना चाहिए। 

 धन्यवाद ,आज की चर्चा को यहीं पर समाप्त करते हैं। 

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