मेरी दादी।



मेरी दादी मां एक बहुत ही अच्छी महिला थी,वह बहुत ही परोपकारी थी और हमेशा दूसरों की मदद किया करती थी।

लेकिन उनकी कुछ आदतें मुझे बिल्कुल पसंद नहीं थी जिसकी वजह से मैं उन्हें कभी भी अच्छी नहीं लगती थी और ना ही वह मुझे कभी अच्छी लगती थी ।
वह मुझे हमेशा किसी भी काम में टोक दिया करती थी बाहर जाने से मना किया करती थी ।एक दिन मैंने उनसे जो चलाते हुए कहा की दादी मां यह तो योगी की सरकार है और इस सरकार में लड़कियों की सुरक्षा बहुत ही कड़ी है इसीलिए आपको मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं बिल्कुल भी असुरक्षित नहीं हूं । 
एक दिन तो हद ही हो गई जब उन्होंने मुझसे कहीं भी जाने के लिए मना कर दिया वह लगातार रट लगाए हुए थी कि तुम कहीं नहीं जाओगी  अभी दो-चार  दिन तो तुम कहीं नहीं जाओगी मुझे अपने कॉलेज जाना था जिसकी वजह से मैंने उनके कोई बात नहीं सुनी और अपने कॉलेज के लिए निकल गई।
 बाहर एक रेस्टोरेंट पर गई वहां पर पेट भरकर खाने के बाद मैं अपने स्कूल जाने लगी। स्कूल के गेट पर पहुंचने के बाद मैंने देखा कि माहौल कुछ ठीक  नहीं था चारों तरफ मानो ऐसा लग रहा था जैसे कि अभी अभी कुछ दंगा फसाद हुआ है सारे लोग डरे और सहमे से जैसे कि किसी ने उन पर आक्रमण कर दिया हो तभी अचानक मैंने एक काम करने वाली बाई को हॉस्टल से बाहर आते हुए देखा बाई के पसीने छूट रहे थे।
 

वह आकर मुझसे बोली मेम साहब ,मेम साहब कृपा करके हॉस्टल के अंदर ना जाएं ।वहां कुछ गुंडे हैं जो आप को मार डालेंगे।मेरे पैरों से ऐसा लगा कि मानों जमीन ही खिसक गई हो।

 डर के मारे मैं पसीना पसीना हो गयी कितना अच्छा होता अगर मैंने अपनी दादी मां की बात मान ली होती और इस समय अपने स्कूल ना रही होती मुझे समझते  देर न लगी कि आखिर हमारे हॉस्टल में गुंडे क्यों आए हैं और वह मुझे ही क्यों मारना चाहते हैं।
दरअसल कुछ दिन पहले की बात है मैं और मेरी एक सहेली सपना घूमने के लिए गए थे रास्ते में हमें कुछ लड़के मिले जोकि हमारे साथ अभद्र व्यवहार करने लगे ।
 फिर क्या था शुरू हो गई मुक्का बाजी चार थप्पड़ हमने लगाए और चार सपना  ने इतना ही नहीं हम दोनों ने मिलकर उन्हें पुलिस के हवाले भी कर दिया यह गुंडे उन्हीं के भेजे हुए थे जो हम से बदला लेना चाहते थे मुझे और सपना को मार कर मामले को रफा-दफा कर देना चाहते थे।
 मैं तो  परेशान थी इसलिए नहीं क्योंकि मुझे मरने का डर था बल्कि इसलिए  कहीं सपना को कुछ ना  हो जाए गुंडे सपना को मार ना डाले हो।
 मैंने हॉस्टल के अंदर जाने की ठान ली और मुझे जिस चीज का डर था बिल्कुल वही हुआ उन लोगों ने सपना को मार दिया और उसका शरीर सोफे के ऊपर पड़ा था मुझे देखकर वह लोग जोरों से हंसने लगे अब मुझे कुछ डर सा लगने लगा था यह शायद इसलिए था क्योंकि मुझे समझ आ गया था कि मेरा अंत निकट है तभी एक गुंडा बोला यह वही लड़की है जिसकी वजह से हमारा भाई जेल में गया है इसे यही मार कर मामले को रफा-दफा कर देना चाहिए ।
शायद मैंने भी अपनी मौत स्वीकार कर ली थी और आंखें बंद  कर ली जैसे ही उसने गोली चलाई पता नहीं क्या हुआ जब मुझे होश आया तो मैंने देखा कि मैं हॉस्पिटल के बेड पर पड़ी हुई थी नर्स से पूछने के बाद कि मैं यहां कैसे आई उसने मुझे बताया कि मुझे यहां मेरी दादी जी लेकर आई हैं,वह काफी घायल है, गोली लगने के कारण काफी जख्मी हालत में है मुझे समझते देर नहीं लगी क्या मेरी दादी ही थी जिसकी वजह से आज मैं जिंदा हूं या फिर जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर मेरी जान बचाई है।

 मैं भगवान से बस यही प्रार्थना करने लगी कि मेरी दादी को बचा ले ताकि मैं उनसे शुक्रिया कर सकूं और की हुई सारी गलतियों की माफी भी मांग सकू ।


तभी अचानक नर्स ने मुझसे कहा कि तुम्हारी दादी माँ तुम ही को बुला रही है,मैं तुरंत दौड़ते दौड़ते उनके पास गई मैंने दादी से पूछा कि वह कैसे जानती थी कि मेरे हॉस्टल में दंगा फसाद हुआ है  दादी ने बताया कि जब मेरी और सपना की उस लड़के से लड़ाई हुई थी तब वह उसी समय वहां पर थी वह देखने आई थी कि मैं कहां घूमने जा रही हूं और क्या वह जगह मेरे लिए सुरक्षित है और इसके बाद से ही उन वह उन गुंडों पर नजर रखने लगी जल्दी ही उनको पता चल गया क्यों है गुंडे हॉस्टल में हैं। यही कारण था कि वह मुझे बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रही थी मैंने अपनी दादी मां को गले से लगा लिया और बिलख बिलख के रोने लगी मैंने कहा दादी मां मुझे माफ कर दीजिए और कृपा करके मुझे छोड़कर मत जाइए दादी मां मेरी  मेरी बात सुन नहीं पा रही थी वह पहले से ही इस दुनिया को छोड़ कर चली गई थी।


धन्यवाद
 
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