कोरोना से क्या सीख लेनी चाहिए।


  अभी पिछले कुछ महीनों से पूरा विश्व एक बहुत ही वैश्विक स्तर की बीमारी से जूझ रहा है जिसका नाम है कोरोना। 


कोरोना के बारे में जो जानकारी होगी कि कोविड-19 एक वायरस था जो चीन के वुहान शहर में सबसे पहले पाया गया था और सुनने में यह भी आया है कि चीन  ने यह वायरस बनाया था लेकिन जो भी हो इस वायरस से बहुत ज्यादा तबाही हुई है जनधन की हानि हुई है हर देश की आर्थिक स्थिति में भी बहुत गिरावट आई है और इसकी वजह से आर्थिक मंदी बहुत ज्यादा हुई है। 


इसकी वजह से लोगों को दूर दूर रहने की सलाह दी जा रही है और काफी महीनों से लॉक डाउन चल रहा है, लगभग सारे काम ही बंद चल रहे थे।


.......अब जाकर कुछ राहत मिली है अब शायद बहुत से क्षेत्रों में कोरोना के केस मिलना कम भी हो गए हैं और अब कोरोना की वैक्सीन भी आ गई है जिससे कि कोरोना के मरीजों पर टेस्ट भी कर लिया है और उसके फायदे भी देखने को मिल रहे हैं।


 लेकिन यह सब तो राजनीतिक और आर्थिक बातें हैं जैसा कि सभी लोग जानते हैं अगर आदमी सीखना चाहे तो छोटी सी छोटी चीज से भी बहुत बड़ी बात सीख सकता है तो क्यों ना इस कोरोना से भी कोई सीख ली जाए।


 देखा जाए तो कोविड-19 एक सामान्य सा वायरस हमको एक बहुत बड़ी सीख दे कर जा रहा है अगर वह चीज हम अपनी जिंदगी में उतार ले या अगर उस चीज को हम फॉलो करने लगे और उसको ठीक प्रकार से समझ जाएं तो हम अपनी जिंदगी में बहुत प्रगति कर सकते हैं।


 आप सबको पता होगा कि कोविड-19 में एक ही सलाह दी जा रही थी अकेले रहें आप जितना सबसे अलग रहेंगे उतनी ज्यादा आप इस बारे से सुरक्षित रहेंगे।


 अगर थोड़ा और गहराई से समझे तो आइए इस पर थोड़ी विस्तृत चर्चा करते हैं

 ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल रहता है,
 कि उनके अंदर आत्मविश्वास नहीं है, 
उनके डिसीजन उनके खुद के नहीं होते हैं,
लोग उन पर अपनी धाक जमाते रहते हैं,
उन्हें समझ में नहीं आता है कि उनके लिए क्या गलत है क्या सही है।


 वह भी लोग किसी से कोई भी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाते हैं।


वह चाहते हुए भी लोगों को अपनी बात नहीं बता सकते हैं।उसके बहुत से कारण होते हैं ।


- ऐसे ही बहुत से सवाल होते हैं जो शायद आप लोगों के मन में उठते ही रहते होंगे।


 कि निर्णय लेने में असमंजस क्यों  होता है।
 सीधी  साफ बात क्यों नहीं कर पाते हैं ।


आचरण में बहुत सी कमियां आ गई है उन्हें कैसे दूर करें।


 तो आपको बता दूं कि जब बालक पैदा होता है तो  वह ना तो अच्छा होता है ना ही बुरा होता है।


 ना ही उसमें कोई अच्छी आदत होती है ना ही उसमें कोई बुरी आदत होती है तो उसके पैदा होने के पश्चात कुछ समय बाद जब लोगों के संपर्क में आता है तो उसमें आदतों का विकास होना शुरू होता है जाने अनजाने में ही सही वह अच्छे लोगों के साथ साथ बुरे लोगों के संपर्क में भी आना शुरू कर देता है जिससे कि उसमें अच्छी आदतों के साथ बुरी आदतें विकसित होना शुरू हो जाती हैं माता-पिता के ध्यान न देने के कारण यह स्वभाविक ही होता है कि बच्चा बुरी आदतों में भी फँसता जाएगा और उसके साथ साथ ही उसके बचपन से ही उसके माता-पिता उसके निर्णय देते हैं। उसे जो भी करना होता है वह अपने माता-पिता की मर्जी से करता है ।
लेकिन गलती यहां तक तो कुछ नहीं है बात गलत यहां से शुरू होती है कि वह अपने मां-बाप मां-बाप के साथ साथ बाकी दूसरे लोगों की बातें भी मानने लगता है और उनकी बातों को सच भी मानने लगता है धीरे-धीरे यह बातें हम पर अपना प्रभाव बनाने लगती हैं और हमारी खुद की सोचने की शक्ति और चेतना शक्ति कमजोर होने लगती है तो हम अपने निर्णय हो के लिए दूसरों पर आश्रित हो जाते हैं ।इससे हमें कोई छोटे मोटे छोटे मोटे नहीं बल्कि बहुत बड़े बड़े नुकसान होते हैं, जिनके परिणाम हम को लंबे समय में देखने को मिलते हैं । जिनके परिणाम बहुत ही भयावह होते हैं। समस्या यहां तक नहीं होती  अगर हम लोगों के संपर्क में ना आए, अर्थात हम ज्यादा लोगों से ना मिले।
 

अछूते रहें।

 
  अब आप समझ गए होंगे कि इस बीमारी का करोना महामारी से किस तरह संबंध है ।कोरोना बीमारी में भी लोगों के संपर्क में नहीं रहने के लिए कहा जाता है।


 लेकिन वह( करोना) बीमारी तो इस बीमारी के आगे बहुत छोटी है उसमें क्या होता है कि आप जैसे ही लोगों के संपर्क में आएंगे उसका असर तुरंत दिखने लग जाएगा तो आप उसका उपचार भी कर सकते हैं लेकिन इस बीमारी का असर भी तुरंत नहीं दिखता है साथ ही साथ आपको लगता है कि आपकी जिंदगी बहुत ही सरल, सहज और आराम से बीत रही है जिसका असर बीते कई सालों बाद पता चलता है जब तक आप अपनी जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद कर चुके होते हैं ।


अगर आप करोना से शिक्षा लेना चाहे तो आप यह शिक्षा ले सकते हैं कि हमें अकेले रहना चाहिए अगर आप अकेले रहेंगे, अलग रहेंगे तो आप लोगों के संपर्क में नहीं आ पाएंगे तो आप को कभी ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा आपको अपने अंदर आदते ही विकसित करनी है।


 तो सबसे पहले तो एक निश्चित उम्र तक अपने माता-पिता के संपर्क में रहिए उसके बाद आपको अपने अंदर गुणों को लाने के लिए इन सामाजिक लोगों की बजाय ऐसे लोगों के संपर्क में आना चाहिए जिन्होंने अपनी पूरी  जिंदगी को समझने में ही गुजार दिया कि जिंदगी को जिया कैसे जाए। 
अगर आप ऐसे लोगों के संपर्क में रहेंगे तो आपको बहुत से फायदे होंगे अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसे लोगों को ढूंढने कहां आपको ऐसे लोगों को ढूंढने की कहीं जरूरत नहीं है।


 आपने रवि दास,रहीम दास, तुलसीदास ,कबीर दास, सुभाष चंद्र बोस ,भगत सिंह , अष्टावक्र, अटल बिहारी बाजपेई,अरविंद घोष, चंद्रशेखर आजाद, एपीजे अब्दुल कलाम आदि लोगों की जीवनी को पढ़ना चाहिए तो आप चेतना के  उस स्तर पर पहुंच जाएंगे जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। आपको ऐसे छोटे-मोटे लोगों से कभी कोई समस्या नहीं होगी।


   अभी क्या होता है जरा जरा सी बात पर आपको अगर कोई भला बुरा कह देता है या आपकी आप में कोई कमी निकाल देता है तो आप तुरंत डिमोटिवेट हो जाते हैं या आपकी कोई जरा सी तारीफ कर देता है तो आप के भाव सातवें आसमान पर पहुंच जाते हैं यह केवल और केवल इन्हीं समस्याओं की वजह से है कि आप अपने आप को भी जानते नहीं हैं आप मानसिक रूप से  स्थिर नहीं है आप लोगों के कहे अनुसार चल रहे हैं जोकि कोरोना से भी गंभीर बीमारी है अगर आपको मेरी बात जरा भी समझ आई हो तो कृपया इस पर अमल करें और अगर आपको फायदा देखे तो कृपया कमेंट करके बताएं । 

धन्यवाद
 अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो  कृपया कमेंट करें शेयर करें और आगे भी पढ़ते रहें।

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