A boy in Hindi

 रघुवीर की उम्र 15 साल है, वह अयोध्या के एक छोटे से कस्बे सीतापुर में रहता है।
 रघुवीर का एक भाई है जिसका नाम श्याम है ,श्याम की उम्र अभी 10 वर्ष है।
 तथा रघुवीर की एक छोटी बहन भी है उसकी उम्र 12 वर्ष है उसकी छोटी बहन का नाम पार्वती है ।
रघुवीर के पिता 3 भाई हैं,उसके पिता का नाम राजीव है रघुभीर की माता का नाम अहिल्या है।
  
     रघुवीर अपने अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा है, सबसे बड़ा होने के कारण उसे उसे माता-पिता प्रेम भी थोड़ा ज्यादा करते हैं लेकिन उसके साथ साथ ही सबसे बड़ा होने की वजह से उसके ऊपर बहुत से जिम्मेदारियां भी है।  
 उसके गांव में पढ़ने की बेहतर व्यवस्था ना होने के कारण उसके पिता उसे पढ़ने के लिए रघुवीर को अपने भाई अर्थात रघुवीर के चाचा के यहां भेज देते हैं रघुवीर के चाचा का नाम सरबजीत है।सर्वजीत अयोध्या के एक शहर में शिक्षक की नौकरी करते हैं रघुवीर उनके यहाँ रहने लगता है धीरे-धीरे रघुवीर पढ़ाई करने लगता है रघुवीर पढ़ाई करने में बहुत ही अच्छा है और उसके क्लास में दूसरा या पहला स्थान हमेशा आता है जिसके कारण उसके घरवालों को से बहुत सी उम्मीदें होती है।
 वैसे भी वह घर का जिम्मेदार लड़का होता है जिसके लिए उसके घरवालों को भी उसे बहुत सी उम्मीदें होती हैं रघुवीर की चाची अर्थात सरबजीत की पत्नी बहुत अनुशासित  महिला है। वे रघुवीर को एकदम अनुशासित व्यक्ति बनाने में बहुत सहायता कर ती है ।
क्योंकि रघुवीर बहुत सीधा और सुलझा हुआ लड़का है तो उसे अपनी चाची क्या रहने में घुलने में तो समस्या आती है लेकिन उसके बाद में जब सहज रूप से रहने लगता है ।
उसके बावजूद भी वह वहां थोड़ा शांत शांत सा और डरा हुआ सा रहता है जिसकी वजह से उसके व्यवहार में बहुत से क्रमिक समय के साथ परिवर्तन आते हैं ।
कुछ समय पश्चात जब  रघुवीर बड़ा हो जाता है अर्थात अकेले रहने लायक हो जाता है तो उसके पिता उसे अपने चाचा के यहां से बुला लेते हैं और  वह आगे की शिक्षा पूरी करने के लिए शहर में एक किराए पर कमरा लेकर रहना शुरू कर देता है इस दौरान रघुवीर को बहुत ही नई चीजें सीखने को मिलती है।
   उसके घर वाले हमेशा उसे एक ही बात कहते रहते हैं  बेटा पढ़ाई मेहनत से करना, बेटा पढ़ाई मेहनत से करना। रघुवीर भी बहुत मेहनत से पढ़ाई कर रहा होता है यहां तक तो सब ठीक चल रहा होता है वह क्योंकि उसे पढ़ाई करने में मजा भी आता है लेकिन धीरे-धीरे अचानक वह पढ़ाई में थोड़ा कमजोर होने लगता है पर उसके घर वालों को से उम्मीदें बन चुकी होते हैं।
 उसके पिता को पता चलता है कि वह पढ़ाई में अच्छे रिजल्ट नहीं दे पा रहा है तो वह उसे डांटते चिल्लाते हैं और आगे पढ़ाई ना कराने की धमकी देते हैं क्योंकि रघुवीर बचपन से अपनी चाची के घर रह रहा था जिस कारण  दबकर रहना उसके स्वभाव आ गया था वह अपने पिता के सम्मुख अपनी सारी बातें खुलकर नहीं रख पाता है ना ही अपने मन के विचारों को प्रकट कर पाता है कि उसके ठीक तरह से न पढ़ने का कारण क्या है।
  अनजाने में अपने पिताजी से वादा करता है कि आगे से ऐसी कोई समस्या नहीं होगी कृपया उसे एक और मौका दिया जाए लेकिन कोई फायदा नहीं होता है।
 उसी एक और मौका दिया जाता है परंतु  उसमें कोई सुधार नहीं दिखाई देता है।
 अब उसे यह पढ़ाई जो किसी समय बहुत अच्छी लगती थी गणित उसका प्रिय विषय था जिसके साथ में खेला करता था। बहुत ही बोझ मालूम पड़ने लगती है जैसे तैसे करके वह अपने इंटर कंप्लीट कर लेता है।
    



 क्योंकि वह अपना मानसिक विकास भी ठीक तरह से नहीं कर पाया था इस कारण उस की आदतों में बहुत सी अजीब चीजें शामिल हो जाती है वह अपने निर्णय खुद नहीं ले पाता है वह अपने निर्णय के लिए पूर्ण रूप से दूसरे पर आश्रित हो जाता है उसके पिता उसे जो कहते हैं वही करता है या बाहर वाले उसे जो सलाह दे देते हैं वह कुछ समय के लिए वही काम करने लगता है फिर उसका उस काम में मन नहीं लगता है तो उससे हर जगह से डांट फटकार मिलती है और आत्मविश्वास भी उसका धीरे-धीरे क्षीण होता चला जा रहा था।
 एक अच्छा  व्यक्ति बनने की लगातार कोशिश कर रहा था वह सोच रहा था कि वह सब लोगों को कैसे खुश रख पाए ऐसा क्या करें कि किसी को उसे शिकायत ना हो यह सब करने के कारण बावजूद भी कोई ना कोई उससे हमेशा गुस्सा नाराज ही रहता था उसके घर वाले भी  तथा उसके रिश्तो के बीच हमेशा तनाव रहता तो उसकी हमेशा उसके पिताजी से लड़ाई  रहती थी वह हमेशा यही सोचता रहता था कि पिताजी को कैसे खुश करे लेकिन उसके पिताजी हमेशा उसे नाराज ही रहते थे ।
   धीरे-धीरे वह इन सब चीजों से अपने आप को बहुत आहत करने लगा वह हमेशा दुखी रहता था इस वजह से कोई उसके पास भटकना नहीं चाहता था उसके कोई दोस्त भी नहीं थी एक दो दोस्त थे जो हमेशा उसकी बेइज्जती ही ही करते रहते थे सारा समाज उसका बुरी तरह से शोषण कर रहा था वह बार बार टूटता था दुखी होता था फिर सहम कर रह जाता था यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कई वर्षों तक चलती रहे वह आवेश में आकर दुख वजह से कई गंदी आदतों का शिकार भी हो गया वह जिन लोगों को अपना समझता था  उनको खुश करने की कोशिश करता था वे लोग मुंह पर तो उसकी तारीफ करते थे लेकिन पीठ पीछे बुराई बुराई करते थे उनको यह बात बिल्कुल बर्दाश्त नहीं थी वह समझता था कि बहुत बुरा है जिस वजह से  लोग उसकी पीठ पीछे बुराई करते हैं उसे ऐसा क्या करना चाहिए कि लोग उसकी पीठ पीछे बुराई करना बंद कर दें।
 उसकी जिंदगी में यह सबचल ही रहा था कि  एक दिन ़़़़़

अगर आपको रघुवीर की जिंदगी में आगे क्या हुआ यह जानने की उत्सुकता है तो कृपया कमेंट करके बताएं ।

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