सही निर्णय कैसे लें?(How to make right decision?)

 आज मैं चेतना के विकास से संबंधित कुछ बातों पर सवाल जवाब करूंगा। 

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आप लोगों के सामने लेकर आया हूं कुछ ऐसे सवाल  जिनके जवाब के बिना आपका जीवन अधूरा है लेकिन शायद ही जो कभी आपके जहन में आए होंगे या आपने शायद ही कभी उनके बारे में सोचा होगा तो चलिए शुरुआत करते हैं, इन सवालों के साथ इनमें से पहला प्रश्न है  

प्रश्न:- हमें किन लोगों की बात माननी चाहिए?

उत्तर:-  हमें किसी व्यक्ति की बात नहीं माननी चाहिए हमें अपने चेतना के आधार पर बात का निर्धारण करना चाहिए कि बात सही है या गलत क्योंकि जरूरी नहीं है कोई बात जो किसी दूसरे बच्चे के लिए सही है आपके लिए भी सही हो या फिर कोई बात जो किसी दूसरे व्यक्ति के लिए गलत है आपके लिए भी गलत है इसलिए आपको अपने खुद के दिमाग का उपयोग करना चाहिए 

प्रश्न:-  क्या हमें किसी भी स्थिति में दूसरे की बात नहीं माननी चाहिए?

 उत्तर :-नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है मेरे कहने का यह आशय बिल्कुल नहीं था मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप दूसरे की बात ना माने मेरे कहने का मतलब यह है पहले आप एक बार स्वयं विचार कर ले कि आप जो काम करने जा रहे हैं वह सही है या गलत अगर वह सही है तो बेशक आप दूसरे की बात मान सकते हैं और दूसरी बात आती है कि क्या हमें किसी भी स्थिति में दूसरे की बात नहीं माननी चाहिए तो यह बात मैं आपको एक उदाहरण के माध्यम से समझाता हूं जैसे कि एक छोटा वाला जब जन्म लेता है तब तो वह कुछ भी नहीं जानता उस स्थिति में उसके कुछ भी चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं होता अगर वह ना चाहे तो भी उसे लोगों की बात माननी ही पड़ती है और जो कि उसके लिए हितकर भी होता है जैसे कि आप सबके घर में एक बिजली वाला प्लग होगा और कई बार आपने देखा होगा कि छोटे बच्चे जब उस प्लग में उंगली डालने की कोशिश करते हैं तब उन्हें डांट दिया जाता है और यह कहकर मना कर दिया जाता है कि दोबारा वहां मत जाना वहां पर भूत है या कोई ऐसा ही उदाहरण देंगे जिससे कि बच्चा दोबारा वहां पर ना जाए जबकि वहां पर भूत बगैरा तो कुछ नहीं होता है तो फिर उन्हें ऐसा क्यों बोला जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका दिमाग उस समय इतना विकसित नहीं होता है कि वह सारी बातों को समझ सके अब उसे  आप समझाने लगेंगे कि बेटा उस प्लग के पास मत जाना वहां पर करंट है तो वह आपकी बातों को तो नहीं समझेगा उल्टा वहां पर दोबारा जा सकता है बच्चा ऐसा जानबूझकर नहीं करेगा बल्कि उसकी चेतना शक्ति इतनी नहीं है कि बात को समझ पाए कहने का आशय सिर्फ इतना है उस समय तो आपकी मजबूरी है कि आप दूसरों की बात माने यह ना चाहते हुए भी आपको दूसरे की बात माननी पड़ेगी ।

प्रश्न :-क्या आप पहले प्रश्न को थोड़ा स्पष्ट रूप में बताएंगे ?

उत्तर :-हां क्यों नहीं जब आप की उम्र 12  वर्ष से अधिक हो जाती है तो आप अपना अच्छा बुरा  स्वयं समझने लगते हैं यह वह उम्र होती है जब आप चीजों को धीरे-धीरे सीख रहे होते हैं आपको अपनी जिंदगी के छोटे-छोटे फैसले खुद से लेकर चेतना को विकसित करने की शुरुआत करनी चाहिए और आपको क्या पढ़ाई करनी है क्या कोर्स करना है खुद के बारे में जानकारी होनी चाहिए आपको क्या अच्छा लगता है क्या बुरा लगता है कौन सी परीक्षा की तैयारी करनी है पढ़ाई करना अच्छा लगता है या किसी दूसरे क्षेत्र में मन लगता है इन सब बातों के लिए आपको अपने मां बाप पर निर्भर नहीं रहना चाहिए यही एक अच्छे युवा की निशानी है।

 प्रश्न:- पहले उत्तर में आपने बोला हमें किसी की बात नहीं माननी चाहिए क्या इस बात से आपका आशय यह है कि आप सब सर्वज्ञानी है?

 उत्तर :-नहीं मेरा आशय ऐसा बिल्कुल नहीं है किसी भी व्यक्ति को प्रत्येक क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं हो सकती वह एक अलग क्षेत्र है आप कहीं  जा रहे हैं और आप रास्ता भटक जाते हैं तो आप रास्ता पूछ लेते हैं इसमें कोई गलत बात नहीं है ऐसे तो आप कहेंगे कि आप पढ़ाई भी क्यों करते हैं आपने अवश्य ही अपने कॉलेज में किसी भी प्रोफेसर का लेक्चर  अटेंड किया होगा इस बात से यह साफ पता चलता है  कि आपका  विषय ज्ञान  उनकी अपेक्षा कम है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह अवश्य ही आपसे चेतना स्तर पर भी ऊपर हैं ज्ञान का क्षेत्र अलग होता है और यह सामाजिक चीजें अलग होती सर्वथा.  ज्ञान लेने में कोई ही समस्या नहीं है आप किसी व्यक्ति से भी ज्ञान ले सकते हैं।

 प्रश्न:-क्या उम्र के साथ चेतना का विकास होता है? 

उत्तर :-उदाहरण के लिए मान लेते हैं एक बुजुर्ग जिनकी उम्र 70 वर्ष वजन 110 किलो लंबाई 6 फुट है शरीर को बीमारियों ने घर बना रखा है तू क्या उनके चेतना का विकास उच्चतम होगा नहीं भाई ऐसा चेतना का उम्र से कोई संबंध नहीं है हां ऐसा अवश्य हो सकता है कि अगर आप अपनी चेतना का विकास करने पर जोर दे रहे हैं तो समय के साथ साथ आप अधिक बुद्धिमान और समझदार होते चले जाएंगे आपने अपने जीवन काल में ऐसे बहुत से लोग देखे होंगे जिन्होंने बहुत छोटी सी उम्र में बहुत बड़े-बड़े काम किए हैं तथा ऐसे बहुत से बुजुर्गों को भी देखा होगा जिन्होंने अपने पूरे जीवन काल में शायद ही कोई ढंग का काम किया होगा उन्होंने अपना पूरा जीवन व्यर्थ ही गवा दिया है.

 प्रश्न :-क्या चेतना को बढ़ाया जा सकता है और कैसे?

 उत्तर:- हां क्यों नहीं चेतना को अवश्य ही बढ़ाया जा सकता है आपको ऐसे व्यक्तियों का साथ बिल्कुल छोड़ देना चाहिए जिनके साथ रहने पर  आप विवेकहीन व्यक्तियों जैसा व्यवहार करने लगते हैं आपको अपनी चेतना का स्तर बढ़ाने के लिए सर्वप्रथम तो अपनी संगति अच्छी करनी होगी उसके पश्चात अपने ज्ञान का स्तर बढ़ाना होगा आपको अध्यात्म की ओर बढ़ना होगा आपको वेद वेदांतों का अध्यन करना चाहिए चेतना का स्तर बढ़ाने के लिए आपको विभिन्न प्रकार की किताबें पढ़ना चाहिए गीता चेतना का स्तर बढ़ाने की रामबाण किताब है आपको गीता का अध्ययन करना चाहिए तथा उसे अपने दिनचर्या में भी  शामिल करना चाहिए।

 प्रश्न:-क्या आप कुछ बातें बता सकते हैं जिनमें हमें दूसरों का विश्वास नहीं करना चाहिए ?

उत्तर :-जैसा कि मैंने पहले ही बताया है हमें सुनना तो हर व्यक्ति की बात को चाहिए लेकिन निर्णय अपने विवेक के आधार पर लेना चाहिए  मैं आपको ऐसी चार चीजों के बारे में बताने जा रहा हूं जो मुझे आचार्य प्रशांत त्रिपाठी के माध्यम से पता चली थी तथा जिन पर अमल करने के पश्चात मुझे वास्तव में   इन बातों की सार्थकता का बोध हुआ.

 प्यार,

 आनंद,

 सत्य,

स्वतंत्रता.

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