मैं नास्तिक हूं क्या मैं खुश नहीं रह सकता?

  आज का टॉपिक है क्या नास्तिक व्यक्ति खुश नहीं रह  सकता है।

 तो आज की बातचीत शुरू करने से पहले मैं आपको बता दूं , मैं एक  आस्तिक व्यक्ति हूं मैं भगवान को मानता हूं और   पूर्ण रूप से विश्वास करता हूं।  और मेरे अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धा का भाव रखना चाहिए -




तो शुरू करते हैं कि मैं  आस्तिक क्यों हूं ,और प्रत्येक व्यक्ति को  आस्तिक क्यों होना चाहिए ?क्या भगवान वास्तव में होते हैं ?और क्या  नास्तिक व्यक्ति खुश नहीं रह सकता ?



वैसे तो मैंने कई बार अपने जीवन में भगवान की कृपा का अनुभव किया है ,लेकिन वह सब को अगर बखान करने बैठ गया तो पहली बात तो बहुत समय हो जाएगा और दूसरी बात आप सब में से किसी को भरोसा नहीं होगा क्योंकि आप लोग मार्डन हो, उसे एक बनी बनाई कहानी समझोगे।



 तो मैं आपसे अपने जीवन के अनुभव को साझा करने की वजाय कुछ तर्क देने की कोशिश करूंगा ।जिससे कि आपको शायद विश्वास हो जाए ,





लेकिन उस सबसे पहले मैं आप सबसे हाथ जोड़कर यही कहना चाहूंगा की जिसको विश्वास है उसको कोई डिगा नहीं सकता और जिसको विश्वास नहीं है, उसको कोई विश्वास करा नहीं सकता,बस इसलिए अगर आप विश्वास करना चाहते हैं वास्तव में। तो विश्वास करके देखिए क्योंकि जब आप विश्वास करेंगे और आपको  जब भगवान की  कृपा का एहसास होगा तो अब निरंतर हम पर विश्वास   रखेंगे।

 भगवान तो हम सबके मां-बाप  होते हैं और हम उन की संताने हैं, जिस प्रकार बाप अपने खराब संतान को घर से बाहर नहीं निकाल सकता या निष्कासित नहीं कर सकता उसी प्रकार भगवान भी अपने किसी भी पुत्र का अहित नहीं कर सकते ।



इस बात को एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं:-

मान लीजिए एक  आदमी के 2 पुत्र हैं, पहले पुत्र का नाम महेश  तथा दूसरे पुत्र का नाम रामलाल है ।अब रामलाल है जो ,वह अपने पिता की बात कभी नहीं मानता है जो भी वह कहते हैं उसका विरोध करता है कभी-कभी उनसे अपशब्द भी कहता है, और उनका  सम्मान तो बिल्कुल ही नहीं करता है ।


और वही दूसरी तरफ महेश है वह बिल्कुल रामलाल के विपरीत है ,वह नित्य पिता की आज्ञा मानता है उनका सम्मान करता है हमेशा उन्हें खुश रखता है शाम को सोते वक्त उनके पैर दबाता है और उनकी सारी वस्तुओं का ध्यान रखता है। अब ऐसा तो नहीं है की वह आदमी रामलाल को नालायक होने  की वजह से घर से निकाल दे, या मार दे, क्योंकि वह तो  पिता ही रहेगा पिता कभी अपनी संतान का अहित नहीं कर सकता लेकिन रामलाल कभी महेश की बराबरी नहीं कर सकता है।और वहीं दूसरी तरफ जो सुख सुविधाएं महेश को अपने पिता से प्राप्त होती हैं वह रामलाल को अपने पिता से कभी प्राप्त नहीं होंगीमाना कि काम रामलाल का भी चलता रहेगा ,लेकिन महेश की जिंदगी ज्यादा  सुखकर कटेगी क्योंकि वह अपने पिता की सेवा करता है ।उनके समर्थन में रहता है तो सीधी सी बात है ,उसके पिता भी उसे उससे ज्यादा खुश रहेंगे।



बिल्कुल यही हाल जिंदगी का है हमारी जिंदगी में परमपिता ईश्वर हैं, और जो व्यक्ति नास्तिक हैं वह नादान रामलाल है, और  क्योंकि भगवान परमपिता है इसलिए वह पालते तो नादान व्यक्तियों को भी है।लेकिन महेश जैसे लोगों का जो उन में आस्था रखते हैं और आस्तिक होते हैं उनकी बात ही कुछ अलग होती है,उनकी जिंदगी के ठाठ ही कुछ अलग होते हैं ।तो कुछ इस तरह नास्तिक व्यक्ति दुखी नहीं रहता लेकिन आस्तिक व्यक्ति की बात ही कुछ अलग होती है ।



 और रही बात विश्वास की तो आपको जीवन में बहुत से ऐसे उदाहरण मिलते रहते होंगे जैसे आप चाहे तो आसानी से भगवान के अस्तित्व पर विश्वास कर सकते हैं, लेकिन आप विश्वास विश्वास नहीं करते हैं  क्योंकि आप अच्छी तरह जानते हैं कि विश्वास करना भी इतना आसान नहीं है ।

आपको अपनी चिंताएं छोड़ नहीं होंगी ,

आपको सब कुछ भगवान पर छोड़ देना होगा

 और मनुष्य की आदत होती है कि वह अपने चिंताएं कभी छोड़ नहीं पाता वह कभी प्रसन्न रह ही नहीं पाता और अगर अआप भी भगवान पर विश्वास करेंगे तो आप प्रसन्न रहने लगेंगे ,आपकी समस्याओं का नाश हो जाएगा आपकी जिंदगी खुशियों से भर जाएगी।

 इसलिए आपको आसानी से भगवान पर विश्वास नहीं होता , क्योंकि बहुमूल्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं ।

आपको केबल भगवान पर विश्वास करना है उन पर श्रद्धा करनी है और उसके सिवाय कोई काम नहीं करना है  , कोई काम जैसे कोई भी काम नहीं करना है सब कुछ भगवान पर छोड़ देना है ।वह जो आपके लिए सबसे उपयुक्त होगा, आप से कराएंगे।




आपने बहुत से लोगों को यह कहते सुना होगा मैं अपनी मेहनत का श्रेय भगवान को नहीं देना चाहता,भगवान ने कुछ नहीं किया है मैंने सब कुछ अपनी मेहनत से प्राप्त किया है अरे भाई एक बार नजर अपनी पूरी जिंदगी पर डाल कर तो देखो ।प्रतिक्षण भगवान ने तुम्हारा साथ दिया है उनके बिना तो तुम एक पल भी नहीं चल सकते अगर अचानक हवा जल्दी बंद हो जाए तोत्रकोई क्या कर सकता है ढूंढते रहो कारण क्या कारण है कि हवा क्यों  बंद हो गई ।


 जो व्यक्ति ज्यादा चिंतित रहते हैं कि अपनी जिंदगी खुद बनाएंगे अपना इतिहास को रचेंगे और पता नहीं क्या-क्या ?

 दुनिया में 4 तरह के व्यक्ति होते हैं,

 एक आते हैं बहुत अधिक पढ़ने लिखने वाले.

 अपनी जिंदगी को लेकर बहुत अधिक चिंतित रहने वाले जो पढ़ाई लिखाई के दौरान साइंस साइड से पढ़ाई करते हैं ,

फिर दूसरी श्रेणी में भक्ति आते हैं जो पढ़ाई लिखाई में थोड़े कमजोर होते हैं। और आर्ट साइड से पढ़ाई पूरी करते हैं तो साइंस साइड से पढ़ाई करने वाले व्यक्ति ज्यादातर बीटेक एमबीए करते हैं। जोकि आर्ट साइड से पढ़ाई करने वाले व्यक्ति जो कि IAS PCS IPSकी तैयारी करते हैं ।और बीटेक एमबीए करने वाले व्यक्ति इन के अंडर में काम करते हैं ,

तीसरी श्रेणी में आते हैं वह व्यक्ति पढ़ाई लिखाई बिल्कुल समझ में नहीं आती है, जो बिल्कुल मस्त रहते हैं जिनको चिंता फिकर बिल्कुल नहीं होती है और यह व्यक्ति राजनीति करते हैं दूसरी श्रेणी के व्यक्ति इन के अंडर में काम करते हैं।

 और चौथी श्रेणी में आते हैं सबसे निहायती लुच्चे, लफंगे, गुंडा ,बदमाश टाइप के लोग जोगी बाबा बनते हैं। तीसरी श्रेणी के लोग इनके अंडर में रहते हैं जैसे कितना भी बड़ा राजनीतिक नेता हो  उनके कई बाबा गुरु  अवश्य होते हैं ।जिनके कहने पर ही वह निर्णय लेते हैं ।लो हो गई आपकी पढ़ाई धरी की धरी रह गई सब चिंता और मैं यह कोई मजाक नहीं कर रहा हूं  यह वास्तविकता है।




  भगवान एक एहसास होता है जो हर पल आपके साथ रहता है कभी आप को अकेला नहीं होने देता है कभी आपको गलत मार्ग पर नहीं जाने देता है हमेशा आपका आत्मविश्वास बड़ा रहता है जैसे जब आपके साथ कोई महान शक्तिशाली आदमी खड़ा होता है तो  आपने डर हो जाते हैं तो सोचे जब आपके साथ सृष्टि  की सबसे बड़ी ताकत आपके साथ जुड़ जाए तो आपकी जिंदगी कैसी होगी बात है सब एहसास की।

6 comments:

  1. kya aap hamare sath blogging me kam karoge .aap bahut accha likhte ho. Mai bhi farrukhabad se hu. 3-4 year se blogging kar raha hu. contact :- 6386067554

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  2. आपके शब्दों म बहुत कुछ छिपा हुआ ह

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