Notout movie review in Hindi.




नॉट आउट मूवी में एक लड़की को उसके सपने की पूरी करने की कहानी को दर्शाया गया है,
 एक लड़की थी सरला एक गांव की रहने वाली थी बचपन से ही उसे क्रिकेट में बहुत ही दिलचस्पी थी लेकिन लड़की होने के कारण उसे कोई क्रिकेट नहीं खेलने देता था लोग यह कहकर बात को पलट देते थे कि क्रिकेट क्रिकेट लड़कों का गेम है और सिर्फ उन्हीं के लिए बना है।
 जब सरला लड़कों के साथ क्रिकेट खेला करती थी तो गांव की भिन्न-भिन्न औरतें उसे ताना मारा करती थी।
    यह सुनकर उसकी मां बहुत ही परेशान हो गई थी और उन्होंने सरला को क्रिकेट न खेलने की बात कही लेकिन सरला मानने वालों में से नहीं थी अपनी मां के लाख मना करने के बाद भी वह रोज क्रिकेट खेलने जाती और उसके पापा भी क्रिकेट के बहुत बड़े फैन थे वह अक्सर टीवी पर क्रिकेट का मैच देखा करते थे और जिस दिन भारत और ऑस्ट्रेलिया के मैच में भारत की करारी हार हुई तो उस दिन में बहुत रोए थे अपने पापा को रोता देखकर सरला ने उनसे कहा कि  वह 1 दिन भारत भारत को जीत दिलाएगी और ऐसा सुनकर उसके पापा बहुत खुश हो गए।
    धीरे-धीरे सरला बड़ी हो गई और उसकी मम्मी की परेशानियां भी बढ़ने लगी एक दिन उसका उसकी मम्मी से काफी झगड़ा हो गया उसने झगड़ते हुए अपनी मम्मी से कहा कि व उसे साफ साफ बता दें कि उन्हें उसका क्रिकेट खेलना पसंद नहीं है या फिर लड़कों के साथ खेलना पसंद नहीं है बस यहीं पर बात खत्म नहीं हुई उसने यह तक कह दिया कि उसकी मम्मी उसके सपनों को मार रही हैं और वह अच्छी नहीं है इतने में उसके पापा घर आ गए और उसके गाल पर तमाचा मार कर कहा कि वह अपनी मां से माफी मांगे सरला के पिताजी एक किसान थे वह लोगों की फसल खरीद कर उसे बेचा करते थे।

 सरला को क्रिकेट गेम में गेंदबाज का किरदार बहुत अच्छा लगता था उसका गेद पकड़ने का तरीका ही कुछ अनोखा था और धीरे-धीरे उसने गेंद को फेंकने की सारी कूट नीतियां सीख सीख ली थी।
    उसके क्रिकेट के टैलेंट को कुछ लोगों ने पहचाना और उसे राज्य स्तर पर खेलने का मौका भी दिया लेकिन क्योंकि वह पहली बार राज्य स्तर पर खेल रही थी इसीलिए काफी डरी हुई थी और इसी कारण से उसने अपना पूरा परफॉर्मेंस नहीं दे पाया और यह सिलेक्ट होते-होते रह गई इसके बाद तो पूछिए ही मत उसके ऊपर तो मानो दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा हो।
ंंंंंंंइस तरफ उसके यहां सूखा आ गया जिसकी वजह से गांव की  उसके पापा को फसल बेचना मुश्किल पड़ गया क्योंकि सूखे की वजह से उनकी पूरी फसल ही खराब हो गई और उनकी नहीं बल्कि आसपास के जितने किसान थे सब की फसल खराब हो गई और उनके यहां तो भुखमरी फैल  गई एक तरफ सरला का राज्य स्तर पर सिलेक्शन ना हो पाना और दूसरी तरफ उसके पिता की पूरी फसल बर्बाद हो जाना दोनों ही कारणों ने उसके पिता को अंदर से इतना कमजोर बना दिया कि उन्होंने तो एक बार आत्महत्या करने की ठान ली लेकिन भगवान की दया से उनके किसी दोस्त ने उन्हें ऐसा करने से मना किया उन्होंने समझाया कि आत्महत्या करना ही हर हर समस्या का समाधान नहीं है बल्कि आत्महत्या करना खुद एक बहुत बड़ी समस्या है आत्महत्या करके वह तो चले जाएंगे लेकिन उनका जो परिवार है उनके जो पत्नी और बेटी है उनका क्या होगा क्या उन्होंने एक बार भी इस बारे में सोचा है इसी देर तक इसी तरह वह काफी देर तक उन्हें समझाते रहे और आखिरकार उन्होंने अपना आत्महत्या करने का मन बदल लिया।
प्रतिज्ञा की वह पूरी तरीके से विपत्ति से लड़ेंगे और उसका सामना करेंगे वह अपनी आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे कभी भी हार नहीं मानेंगे और कुछ इसी तरीके से प्रतिज्ञा कर रखी थी। सरला ने उसने प्रतिज्ञा की थी कि भले ही राज्य स्तर पर उसका सिलेक्शन ना हुआ हो लेकिन वह क्रिकेट खेलना नहीं बंद करेंगी उसके सपने नहीं टूटेंगे वह निरंतर प्रयत्न करेंगी और वह कभी गांव में जाते कभी खेतों में कभी कुएं के पास बस उससे तो अब क्रिकेट का भूत जैसे सवार हो गया हो इसकी इस तरीके के टैलेंट को देख करके धीरे-धीरे उसका सिलेक्शन नेशनल लेवल पर हुआ इसके बाद उसे उन लड़कियों के साथ में रहने के लिए एक निवास स्थान भी मिल गया जहां पर सिर्फ और सिर्फ लड़कियां ही थी लेकिन यार यह क्या उसने सोचा था यहां आकर वह अपने पिता जी के सपनों को आराम से पूरा कर देगी।
लेकिन यहां पर तो उसके सीनियर्स उसके साथ बहुत ही बुरी तरीके से व्यवहार करते थे छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ा करने लगते थे और बिना ही किसी बात के उसे सताते थे ऐसा व्यवहार देखकर वह भी अंदर से कमजोर होने लगी और फूट-फूट कर रोने लगे वह सोचने लगी है क्या कभी वह अपने पिताजी का सपना पूरा कर पाएगी यहां पर तो उसे कोई मानता ही नहीं नहीं।
     कोई क्या कभी लोग उसके टैलेंट को पहचान पाएंगे और क्या कभी उसके पिताजी इतनी बड़ी विपत्ति उसके परिवार के सामने खड़ी है उससे बाहर निकल पाएंगे ऐसा सोच कर उसका दिल बैठ गया और वह फफक कर रोने लगी।
 लेकिन कहते हैं ना सब के दिन पलटते हैं इसी तरीके से कुछ सरला के साथ भी हुआ उसके दिन पलटने में देर नहीं लगी भगवान ने उसकी मदद की।
 अचानक से उसके कोच ने कहीं और जाने का फैसला किया और नए कोच आ गई है नए कोच ने तो मानो उसकी जिंदगी ही बदल दी इन्होंने उससे विश्वास दिलाया कि वह भी एक दिन भारत के लिए खेल खेलेगी और न sirf खेलेगी बल्कि जीतेगी भी।
 दरअसल यह कोच  पहले एक मकैनिक हुआ करते थे इनका भी एक पैशन था कि क्रिकेट में खेलना लेकिन एक दिन क्रिकेट में खेलते समय वाल इन की आंख में लग गई और इन्हें अंधा बना कर चली गई।जिसके बाद तो इनका क्रिकेट का सपना ही टूट गया अब इन्हें अपना सपना पूरा करने की उम्मीद सरला में दिखने लगी। 
........उन्हें लग रहा था कि सरला इन के सपने को भी पूरा करेगी और साथ में अपने और अपने परिवार के उम्मीदों पर भी खरी उतरेगी उन्होंने सरला को बहुत ही कड़ी ट्रेनिंग दी और उसे पूर्णतया रूप से भारत की तरफ से खेलने के लिए तैयार किया उसे बहुत सारे नीतियां  बता भारत की तरफ से खेलने के लिए तैयार किया उसे बहुत सारे सेटिंग बता भारत की तरफ से खेलने के लिए तैयार किया उसे बहुत सारे सेटिंग बताएं जिसका इस्तेमाल  उसे खेल के टाइम करना था।
     सरला ने एक दिन अपने पापा को फोन करके बताया कि वह वर्ल्ड कप में खेलने जा रही है तब खुश थे टीवी चलती भी चलाई गई और मैच देखने के लिए बैठ गए लेकिन यह क्या सरला तो आई ही नहीं सरला ने मैच ही नहीं खेला तो उनमें से बैठे लोगों में से एक  ने कहा कि हमने यही बैठकर तेंदुलकर और विराट के लिए तालियां बजाई थी लगता है सरला को हमारी तालियां मिल ही नहीं पाएंगे और वैसे भी हम तो खेल देखने इसलिए आए थे क्योंकि हमें लगा था यह सरला भी खेलेगी लेकिन सरला तो खेली नहीं रही अब मैच देखने से क्या फायदा कोई जीते कोई हारे हमें क्या।
     ऐसा कह कर सारी भीड़ धीरे-धीरे करके खत्म होने लगी बाद में पता चला कि सरला की कोच ने जानबूझकर सरला को खेल में मौका नहीं दिया वह चाहते थे कि वह सबसे अंतिम मैच खेले और जीते।
हुआ भी कुछ ऐसा ही सरला ने अंतिम मैच खेला और वह जीती जीत के बाद जब उसे भाषण देने के लिए बुलाया गया तो बताएं सरला ने क्या कहा उसने कहा कि इस जीत से उसे तनिक भी खुशी नहीं हो रही है क्योंकि उसके पिताजी सड़क पर बैठकर टेलीविजन में उसका यह प्रोग्राम देख रहे हैं उसका सारा घन उससे छिन गया है और भुखमरी के विपत्ति उसके परिवार पर टूट पड़ी है इसलिए इस पर पैसे से जितना हो सके तो उसके परिवार वालों की मदद कर दी जाए और उन्हें उनका घर वापस कर दिया जाए ऐसा सुनकर सबकी आंखें भर आई सब भाव विभोर हो  उठे।

No comments:

Powered by Blogger.