नौकर नहीं, मालिक बनो।

 



दुनिया में 87 परसेंट लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने काम से बिल्कुल भी प्यार नहीं होता है और वे जबरदस्ती दूसरों के गुलाम होकर मजबूरी में केवल काम करते रहते हैं इसका कारण केवल इतना होता है कि वह खतरा नहीं उठाना चाहते हैं  अपनी जिंदगी मे सुरक्षित रूप से खेलना पसंद करते हैं जिसके कारण वे नौकरी करना चुनते हैं और जिंदगी भर उसी में फंसे रहते हैं दूसरों के गुलाम बनकर हालांकि उन्हें लगता है की नौकरी में व्यापार की अपेक्षा कम काम करना पड़ता है और खतरा भी कम होता है लेकिन ऐसा नहीं होता है क्योंकि मैंने बताया है उन्हें केवल ऐसा लगता है अब आप सोच रहे होंगे की जब नौकरी में इतनी समस्याएं हैं तो आदमी नौकरी करता क्यों है तू इस बात को मैं आपको एक कहानी के माध्यम से समझाता हूं,

     -रॉकी और विवेक दो दोस्त हैं दोनों दोस्त पढ़ने में होशियार और दिमाग में भी काफी तेज हैं रॉकी का बचपन से ही सपना होता है कि वह किसी बड़ी कंपनी में जॉब करेगा और एक अच्छा पैकेज पाएगा जबकि विवेक का सपना अपनी खुद की कंपनी खड़ी करने का होता है जब वे लोग अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं चोरों की बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी के लिए अपना रिज्यूम देता है और अच्छी कंपनी में सिलेक्ट हो जाता है और 10 लाख रुपए प्रति वर्ष से अधिक का पैकेज शुरू हो जाता है जैसा कि वह हमेशा चाहता था और उसके भविष्य का प्रधान ही होता है कि वह धीरे-धीरे एक कंपनी से निकलकर दूसरी कंपनी में जाएगा और अपनी पुरानी सैलरी की रसीद  दिखाकर उन्हें और ज्यादा पैसा देने के लिए कहेगा और धीरे-धीरे उसका पैकेज बढ़ता जाएगा वह उसकी लाइफ to set है और ऐसा ही चल रहा होता है धीरे-धीरे उसकी सैलरी 3500000 रुपए पर ईयर हो जाती है और उस पर काम का भाई भी लगातार बढ़ता रहता है वह सोचता है कि उसकी जिंदगी तो बहुत आराम से कटेगी लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता है उसकी जिंदगी थकान मेहनत और बोरियत से बुरी तरह से भर जाती है वह अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा परेशान रहने लगता है उसे अपने स्वास्थ्य से भी समझौता करना पड़ता है और शारीरिक रूप से भी बीमार रहने लगता है एक दिन वह सोचता है कि चलो क्यों ने विवेक से बात की जाए वह तो किसी भी कंपनी के इंटरव्यू में भी नहीं बैठा था उसकी हालत तो मुझसे भी ज्यादा खराब होगी तू इस तरह से सोच कर वह विवेक को फोन करता है विवेक से पूछता है भाई क्या हाल है कहता है कि कुछ नहीं बस यहां दिन रात काम में लगा रहता हूं और ऊपर से वह भी परेशान करता रहता है बाद में फिर अपनी तारीफ करते हुए कहता है कि बस खुशी की बात यह है कि साल में तीस लाख का पैकेज मिलता है तू बता तेरा क्या चल रहा है तूने तो कहीं नौकरी भी नहीं की होगी विवेक कहता है बस भाई कुछ नहीं मैंने तुझे पहले ही बताया था कि मुझे नौकरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं है मैं तो अपना बिजनेस करूं गा तो बस वही छोटी सी कंपनी खोली है और कुछ खास नहीं अरे  वह छोड़ तू यह बता कि तू कितना कमा लेता है वह कहता है कुछ नहीं भाई बस बताया तो थोड़ा बहुत पैसा पैदा कर लेता हूं बस अरे बताना कि कितना कमा लेता है सीधे-सीधे बस भाई महीने में 2-3 करोड़ कमा ही लेता हूं व्यापार से रॉकी के यह सुनकर होश उड़ जाते हैं वह कहता है अरे यह कैसे तो विवेक कहता है भाई मैंने तो तुझसे पहले ही बोला था कि बिजनेस करूंगा।

उम्मीद है आप लोगों को मेरे कहने का मतलब समझ में आ ही गया होगा दुनिया में 90 परसेंट लोग रॉकी की तरह होते हैं वे लोग सोचते हैं कि जिंदगी इसी का नाम है कि किसी बड़ी कंपनी में जॉब ले लो और फिर तो लाइफ सेट है बॉस लेकिन देखा जाए तो इसमें अलौकिक की कोई गलती नहीं है क्योंकि उसे बचपन से ऐसे ही संस्कार मिले हैं कि बेटा जिंदगी में बिल्कुल भी खतरे नहीं लेना चाहिए और उसे हमेशा नौकरी के लिए ही प्रोत्साहित किया गया है जिस वजह से वह अपनी वास्तविक शक्ति भूल चुका है कि वह या फिर दुनिया के अधिकतर लोग या फिर प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में मालिक होता है इस भूल की वजह से ही सभी लोग मजबूरी में अपनी जिंदगी काट रहे हैं कुछ ही लोग होते हैं जो इस जाल को समझ पाते हैं और वही वास्तव में जिंदगी का असली मजा लेते हैं बाकी जो नौकर वाली मानसिकता वाले लोग होते हैं वे तो केवल अमीरों के लिए मजो का बंदोबस्त करते हैं।


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