10 amazing psychological facts इन हिंदी





 आज की पोस्ट में मैं आपको कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में बताऊंगा जिनके बारे में शायद ही आपको जानकारी होगी और अगर आप इन तथ्यों को जान लेते हैं तो आपको मानव जीवन को समझने में और इंसान को समझने में काफी सहायता मिलेगी और आपकी जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी यह तथ्य हर इंसान पर लागू होते हैं तो चलिए शुरू करते हैं.

        

                         Sip on hot drinks 

 जो लोग काम करते वक्त गरम ड्रिंक पीना पसंद करते हैं बे अन्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा गर्मजोशी और किसी काम के प्रति ज्यादा खुश नजर आते हैं साइकोलॉजी के अनुसार वे लोग अन्य लोगों को ज्यादा प्रभावित करते हैं आपको यह जानकर हैरानी होगी लेकिन यह सच है और तभी आपने देखा होगा की कहीं भी बिजनेस मीटिंग में या फिर किसी दूसरे इंपॉर्टेंट काम में गरम पेय पदार्थ लोग खूब लेते हैं इस वास्तव में हमारे दिमाग में परिवर्तन आता है और हम ज्यादा प्रभावी तरीके से सोच पाते हैं इसके विपरीत ठंडे ड्रिंक्स को लेना हमारे दिमाग को ठंडा कर सकता है और हमारी सोचने की क्षमता धीमी हो जाती है।

      

                         Argue gracefully

 इस बात से आप सभी लोग सहमत होंगे कि आप में से हर किसी की बहस कभी ना कभी कहीं ना कहीं जरूर होती रहती होगी एक तरफ जहां बहस को लड़ाई का कारण बताया जाता है वहीं दूसरी तरफ अगर आप अपनी बात को सही सिद्ध करना चाहते हैं तो आपको बहस करनी होती है और सही तरीके से उसे जितना भी होता है तो मनोविज्ञान के अनुसार आप किस तरह से बहस करते हैं यह आपके व्यक्तित्व को बताता है ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं कि अपनी बात साबित करने के लिए तेज तेज से चिल्लाने लगते हैं जोकि बिल्कुल ही गलत तरीका है और इसका दूसरों पर भी आप की छवि को लेकर गलत प्रभाव पड़ता है वही दूसरी तरफ ऐसे लोग भी होते हैं जो शांत स्वभाव के होते हैं भी बहस में चुप रहना सही समझते हैं और अपनी बात नहीं कह पाते हैं ऐसे भी लोग वास्तव में सही प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं बहस करने का सही तरीका होता है कि चाहे आप का विरोधी कुछ भी करें आपको एक शांत लहजे में व्यवहारिक तरीके से अपनी बात को कहते जाना है वह खुद ही शर्मिंदा होकर चुप हो जाएगा और यही बहस जीतने का और करने का सबसे उत्तम तरीका है।


                 Creating learning goals

 आपकी सफलता के मौके ज्यादा होते हैं जब आप अपने जीवन के लक्ष्य को जीतना नहीं मानते हैं बल्कि कुछ नया सीखना मानते हैं और हमेशा सीखते रहना मानते हैं आप में से ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि यह कैसी बात है लेकिन अगर थोड़ा गहराई में जाए तो आप देखेंगे आजकल हर कोई इंसान जीतना चाहता है वह चाहता है कि वह जिस क्षेत्र में भी है उसे उसमें जल्दी से जल्दी सफलता मिल जाए लेकिन ऐसा तब तक संभव नहीं है जब तक कि आपको उस क्षेत्र में निपुण नहीं हो जाएंगे और मान लीजिए आपको धोखे से सफलता मिल भी जाती है तो वह क्षणिक होगी और धोखे की होगी तो उस क्षेत्र में निपुण होने के लिए आपको उस क्षेत्र को अपनाना होगा और चाहना होगा उदाहरण के लिए अगर एक एमबीए करने वाला छात्र एमबीए करने के बाद भविष्य मिलने वाली नौकरी के बारे में सोचें तो वह पढ़ाई तो करेगा लेकिन उस छात्र के मुकाबले बहुत कमजोर होगा जो नौकरी में सोचने के बजाय अपने एमबीए के विषयों से प्यार करें और उन्हें पढ़ने में उसे अच्छा लगता हो तो उसे स्वता ही एक अच्छी कंपनी में जॉब मिल जाएगी।


               Music changes personality 

पहले भी कई पोस्ट तो मैं मैं आपको गानों के प्रभावों के बारे में बता चुका हूं आप सभी लोग अच्छी तरह से जानते होंगे कि गाने हमारे मूड को बदलने में बहुत भूमिका निभाते हैं अगर आप रॉक और पार्टी वाले गाने सुनते हैं तो आपका मूड अपने आप अच्छा हो जाता है और अगर आप सैड सॉन्ग से सुनते हैं तो आपका मूड बेवजह ही देवदास वाला हो जाता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गाने हमारे पर्सनालिटी पर भी अच्छा खासा असर डालते हैं अगर आप पार्टी सोंग्स को सुनते हैं और खुश रहने वाले गाने लगातार बहुत समय से सुनते आ रहे हैं तो आप हमेशा खुश ही रहेंगे और आपके आसपास रहने वाले लोगों से आपको खुशी मिलेगी मतलब आपका एक व्यक्तित्व हो जाएगा खुश रहने का और वही अगर आप इमोशनल और सैड सोंग्स को सुनते हैं और उन्हें काफी समय तक सुनते रहते हैं तू धीरे धीरे आपके व्यक्तित्व में बे ही गुण आ जाएंगे और आपकी पर्सनालिटी एक दुखी और दिल टूटे हुए आदमी की पर्सनालिटी जैसी हो जाएगी जबकि उसका आपकी जिंदगी में वास्तविकता से दूर हो दूर हो तक चाहे ना ताना हो लेकिन अगर आप इस तरह के गाने सुनेंगे तो आपके साथ वास्तविकता में भी वही घटित होगा।


                   Wash your guilt away 

मनोविज्ञान के अनुसार अगर आप हाथ धोते हैं या किसी दूसरे इंसान को हाथ धोते हुए देखते हैं तो आपको बहुत ही ज्यादा मानसिक शांति मिलती है और आपको अंदर से एक हल्के होने वाली या फिर समस्याओं से मुक्त होने वाली भावना आती है ऐसा शायद इसलिए होता होगा कि जब आप हाथ बोलते होंगे तो आपको लगता होगा कि आपने जो गलतियां की हैं वह शायद कम हो गई है यह आपके पाप धुल गए हैं जिससे आपको बहुत मानसिक सांत्वना मिलती है।

   

   Appearance influences your confidence 

अगर आप हमेशा आत्मविश्वास से भरे हुए रहना चाहते हैं तो आपको अपने बाहरी दिखावे पर भी काफी ध्यान देना होगा किस बात से बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता है कि आप अंदर से कैसे हैं लेकिन अगर आप का रहन सहन और कपड़े पहनने का तरीका और कपड़े अच्छे नहीं हैं तो आप बहुत ज्यादा खुश नहीं रह सकते हैं यहां कहने का यह मतलब नहीं है कि जिनके पास पुराने कपड़े हैं वह दुखी हैं और जो नए कपड़े पहनते हैं अबे बहुत खुश रहते हैं कहने का केवल इतना मतलब है कि अगर आप साफ-सुथरे और अच्छे कपड़े पहन कर रहते हैं तो आपके स्वभाव में एक अलग ही लेवल का आत्मविश्वास नजर आता है उदाहरण के लिए आप खुद ही विचार कर सकते हैं कि जब आप रोज वही पुराने कपड़े पहनते होंगे तो जब आप सुबह से कपड़े पहनते हो तो आपको मन में कैसे विचार आते हैं और जब आप किसी दिन कोई नया क्लॉथ ट्राई करते हैं तो उस दिन आपके मन में कैसी भावनाएं आती हैं क्या दोनों में अंतर नहीं है आप इससे इस चीज को बहुत अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

      

               Look far to clear the space 

 जब आप किसी भीड़भाड़ वाले इलाके में जाते हैं सिया आप कभी बाजार में जाते हैं यहां पर बहुत भीड़ होती है तो सीधी सी बात है कि आपको बहुत समस्या आती होगी चलने में लोग आपसे टकराते रहते होंगे और आप भी शायद लोगों से ना चाहते हुए टकराते रहते होंगे अगर आप इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह मनोवैज्ञानिक तथ्य आपकी काफी हद तक मदद कर सकता है तो इसके लिए आपको यह करना है आपको अपने आसपास के लोगों को देखने की बजाय और उन्हें इधर-उधर करने की वजह ज्यादा दूर तक देखना चाहिए क्योंकि जब आप दूर तक लोगों को देखेंगे तो दूर से आते हुए लोग आपसे पहले ही आई कांटेक्ट बना पाएंगे और वे आसानी से समझ जाएंगे कि आप रास्ता खाली करने की मांग कर रहे हैं तो अबे पहले ही इधर-उधर हो जाएंगे और आपके लिए रास्ता खाली हो जाएगा अब मैं यह नहीं कह रहा है कि आपके लिए रास्ता पूरा खाली हो जाएगा लेकिन हां यह साइकोलॉजी कल fact आपकी काफी मदद कर सकता है।

  

        sit beside to show companionship

 जब आप किसी से डिबेट करते हैं और आप उस इंसान को गलत नहीं ठहराना चाहते हैं जो कि वास्तव में गलत होता है और आप अपनी बात को भी सही साबित करना चाहते हैं तो यह मनोवैज्ञानिक तथा आपकी काफी हद तक मदद कर सकता है आपको अपनी बात उससे मनवाने के लिए करना यह है कि आप को उसके सामने नहीं बैठना चाहिए जब आप उससे अपनी बात कह रहे हो बल्कि आपको उसके बगल में बैठ कर अपनी बात कहनी चाहिए इसलिए होगा यह कि जब आप उसके सामने बैठ कर कोई बात विरोधी बाली कहते हैं तो आप मैं उसको अपना विरोधी नजर आता है और आप से उसको खतरे का अहसास होता है तो चाहे बात आपकी कितनी भी सही हो वह कभी नहीं मानेगा और वही अगर आप उसके बगल में बैठते हैं तो मैं आपको अपना साथी मानता है और  बात पर विचार करता है क्योंकि उसका दिमाग को लगता है कि उसे आप से कोई खतरा नहीं है।


 Escape any conversation by being concerned

 जब आप किसी इंसान से बात करते हैं और कभी-कभी ऐसा आता है कि बातचीत एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाती है जहां पर वह इंसान कुछ भी फालतू बातें करने लगता है और आप उस बातचीत को बिल्कुल भी इंजॉय नहीं करते हैं और उस कन्वर्सेशन से बाहर निकलना चाहते हैं लेकिन ऐसी स्थिति में आप कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि अगर आप सीधे मना करते हैं तो सामने वाला व्यक्ति नाराज हो जाता है और आप उसे नाराज नहीं कर सकते हैं तो ऐसी स्थिति में क्या करना ठीक रहेगा आपको वास्तव में सीधे मना करने की बजाए कुछ इस तरह से मना करना है जैसे कि आपको कहना चाहिए कि मुझे लगता है कि आपको अब अपना काम करना चाहिए मैं बेवजह अपना और आपका टाइम वेस्ट कर रहा हूं और आप जब यह कह कर बाकी को खत्म करेंगे तो आप आसानी से बातचीत को खत्म भी कर सकते हैं और कन्वर्सेशन एक नेचुरल मोड पर जाकर ही खत्म होगी।

 

            Our memories are like clips

 हमारे सभी लोगों के दिमाग में पता नहीं कितने तरह के विचार आते रहते हैं जब हमारे दिमाग में किसी घटना से संबंधित कोई जानकारी होती है तो वह जानकारी कई तरह की होती है और उसमें लगभग 60 परसेंट जानकारी ऐसी होती है जो बिल्कुल निराधार होती है और उसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है जो हमारे अपने दिमाग की उपज होती है और जो यूट्यूब पर पड़ी हुई शॉर्ट क्लिप्स की तरह होती है जिनका क ई बार वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है और यह एक वास्तविक फैक्ट है तो आगे से अगर आप किसी चीज पर कोई प्रतिक्रिया लेते हैं तो आपको यह चीज अच्छी तरह से पता होनी चाहिए कि आप जो सोच रहे हैं वह वास्तव में सच है या फिर केवल आपके दिमाग की उपज है उदाहरण के लिए जब आप किसी इंसान से मिलते हैं तो आप उससे मिलने से पहले कुक्षी तथ्यों के आधार पर उसके बारे में बहुत से छवियां बना लेते हैं जो बिल्कुल भी सच नहीं होती है।

 धन्यवाद

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