किसी भी गंभीर परिस्थिति में परिपक्व बने।


 जब हम अपनी जिंदगी में परिपक्व हो जाते हैं या फिर लोग कहने लगते हैं कि वह इंसान मैच्योर हो गया है तो इसका सीधा मतलब यह होता है कि हमारा समस्याओं को देखने का नजरिया बदल जाता है हम बहुत ही ज्यादा शांत और गंभीर इंसान हो जाते हैं बाहर की कोई भी वस्तु या कोई भी एक समस्या हमारे अंदर तक हमें झक झोरकर नहीं रखती हैं,

 एक छोटा लड़का भी बहुत ज्यादा मैच्योर हो सकता है और एक बहुत अधिक उम्र का आदमी भी बिल्कुल बेवकूफी भरा हो सकता है,

 .तो परिपक्वता का उम्र से कोई संबंध नहीं होता है इसका संबंध सीधे इस बात से होता है कि आपने जिंदगी में कितने अनुभव किए हैं और उनसे क्या-क्या सीखा है।

 . बच्चे बिल्कुल भी मैचुअर नहीं होते हैं इसलिए जब हम छोटे होते हैं तो हमारे पास अनुभवों की बहुत ज्यादा कमी होती है हमने बहुत सी ऐसी चीजें होती है जिनके बारे में कभी सुना नहीं होता है और हम जिंदगी के ऐसे पड़ाव में होते हैं जहां हम लगातार नई नई चीजों से रूबरू हो रहे होते हैं और हमें पढ़ते एक नई चीज का सामना करने में बहुत ज्यादा डर लगता है क्योंकि हमने कभी उनके बारे में सुना नहीं होता है तो हम उनके बारे में अपनी कल्पनाओं में भूत चुड़ैल परेशान करने वाली चीजें और अन्य डरावनी चीजों को भर लेते हैं ऐसा लगभग हर किसी के साथ हो ता है और अगर हमें कोई भी ऐसा इंसान नहीं मिलता है कि जो हमारे सिर पर हाथ फेर कर हमें चीजों को लगातार अच्छी तरह से समझ आए और फिर हमारे देखने के नजरिया को बढ़ाएं या फिर हमारे ज्ञान को बढ़ाएं अगर ऐसा आदमी मिल जाता है तो तो अच्छी बात है लेकिन जिन लोगों को ऐसा इंसान नहीं मिलता है तो उनकी यह चीजें उनकी उम्र के साथ नहीं बदलते हैं और उनके उम्र के हर पड़ाव पर उनके साथ रहती हैं जिसकी वजह से वे लगातार अपरिपक्वता बेवकूफी भरी हरकतें करते रहते हैं और कभी नहीं बदलते हैं तो ऐसा होता है आपके साथ आप अपनी बचपन की चीजों को कभी भुला नहीं पाते हैं और दुनिया को हमेशा अपने उस उस डरावनी सोच के माध्यम से ही देखते हैं जो आपने अपने बचपन में केवल पाल रखी होती है मतलब जो केवल आपका भ्रम होता है और जिसकी वजह से 

जब आपकी जिंदगी में कोई बड़ी समस्या आती है,तो अपरिपक्व लोग बुरी तरह से चिल्लाने लगते हैं और उन्हें लगता है कि जिंदगी में सब कुछ खत्म हो गया है जिससे कि उनके आसपास के और सभी लोगों का भी मनोबल गिर जाता है और सारे लोग परेशान हो जाते हैं इमैच्योर  लोगों के साथ किसी भी परेशानी को  पास करना नरक से भी ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि वे लगातार उस परेशानी को बहुत ज्यादा पहले ही बढ़ा रहे होते हैं पर इस बात से बिल्कुल नहीं पड़ता है कि कोई भी परेशानी कितनी बड़ी है या छोटी आपका देखने का नजरिया उस परेशानी को छोटा या बड़ा बनाता है जो मैच्योर लोग होते हैं वह उस परेशानी से होने वाले सारे लाभ हानि और नुकसानों को आसानी से देख लेते हैं क्योंकि उनका नजरिया बहुत ज्यादा बड़ा होता है और उसे भी बहुत ही सरलता से पार कर जाते हैं और वही इमैच्योर लोग परेशान हो जाते हैं जिसका फायदा दूसरे लोग भी बहुत ज्यादा उठाते हैं वे उन लोगों को ऐसी स्थिति में डरा धमका कर उनसे पैसा भी वसूलते हैं और भी उनका बहुत ज्यादा फायदा उठा सकते हैं ,

अब आप आसानी से जान गए होंगे कि संसार में दो तरह के लोग होते हैं  

१.एक होते हैं जो समस्याओं को देखकर उनसे घबरा जाते हैं और दूसरों को भी डरा देते हैं और, 

२.दूसरे लोग होते हैं जो समस्याओं को देखकर बिल्कुल भी परेशान नहीं होते हैं मैं खुद भी शांत रहते हैं और दूसरे लोगों को भी तसल्ली बनाते हैं और आसानी से उन समस्याओं को पार कर जाते हैं वे लोग बहुत ज्यादा शांत होते हैं और बाहर की कोई भी समस्या उन्हें बिल्कुल भी  परेशान नहीं करती हैं ।

अगर इन सब बातों को 2 पॉइंट्स में कहा जाए तो वे कुछ इस तरह से होंग ,

 1. शांत रहना सीखो शांत रहना एक बहुत अच्छी कला होती है जिसे आप कभी भी अपने अंदर विकसित कर सकते हो यह एक सबसे साधारण तरीका होता है जिससे कि आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हो और यही एक इकलौता तरीका होता है जिसकी बदौलत आप अपने बचपन के माइंडसेट को चेंज कर सकते हो और अगर आपके साथ हो कोई ऐसी समस्याएं हुई है जो मैंने ऊपर बताई है कि आपको किसी के साथ नहीं मिला है तो आप उसे बिल्कुल बदल सकते हो और एक बहुत ही ज्यादा परिपक्व इंसान में बदल सकते हो तो आपको आज से ही शांत रहने की कोशिश करने की शुरुआत कर देनी चाहिए.

2.बाहर की तरफ ध्यान लगाओ क्योंकि डर एक ऐसी चीज होती है जो आपका सारा ध्यान केवल आप पर ले आती है और आप कुछ इस तरह से सोचने लगते हैं कि अगर किसी इंसान के साथ ऐसा बुरा हो गया तो आपका क्या होगा जैसे उदाहरण के लिए आप कभी कदार सोचते होंगे कि अगर मेरे पेरेंट्स को चोट लग गई या खत्म हो गए तो मेरा क्या होगा या फिर अगर मेरे ही एक्सीडेंट हो गया तो मेरा क्या होगा या फिर किसी भी ऐसी तरह की बहुत से विचार आपके दिमाग में आते होंगे लेकिन अगर आप ध्यान से देखें तो आप उन लोगों की चिंता कम कर रहे हैं आप लोग वहां पर अपनी चिंता ज्यादा कर रहे हैं और यह सब केवल आपके डर की वजह से और आपके सोचने की वजह से हो रहा है इससे बचने का केवल एक ही तरीका है कि आप अपने बारे में सोचना छोड़ कर उन लोगों के बारे में सोचें अगर उनके साथ कुछ ऐसा होने वाला है तो आप उनकी मदद कर सकते हैं आप इस से ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं यह आप भली-भांति जानते हैं तो सोचने से कोई फायदा नहीं है इससे आप केवल अपना नुकसान ही करेंगे.

 धन्यवाद

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