निराशा किन कारणों से होती है

 

 तो आज की पोस्ट में मैं आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताऊंगा जो आपके अंदर जरूर होंगी और जिनकी वजह से आपको कोई भी काम करने से पहले ही हार मान लेते होगे या फिर उस काम को इन्हीं आदतों की वजह से बीच में छोड़ देते होगे उसे उसकी मंजिल पर पहुंचाने से पहले।

 तो चलिए शुरू करते हैं ,

1.अपनी तुलना दूसरों से करना हर इंसान अपने क्षेत्र में अलग होता है और हर इंसान की अलग पहचान होती है लेकिन हम यह बात अच्छी तरह से जानने के बावजूद भी हमेशा भूल जाते हैं और अपने आप की तुलना दूसरों से करने लगते हैं और अगर हम ऐसा नहीं भी चाहते हैं तो लोग हम से अपनी तुलना करते हैं इसके बावजूद कहीं ना कहीं हमारे दिमाग में यह बात जरूर आ जाती है कि दूसरा आदमी हमसे कई बेहतर है या फिर हम किसी आदमी से बेहतर हैं यह दोनों ही चीजें हमारे लिए नुकसान दे होती हैं चाहे हम किसी को अपने आप से बेहतर माने चाहे हम अपने आप को किसी से बेहतर माने हमें अपने बारे में कभी सोचना ही नहीं चाहिए क्योंकि अगर हम अपने आप को दूसरों से बेहतर मानेंगे तो हमें घमंड हो जाएगा और अगर हम दूसरों को अपने आप से बेहतर मानेंगे तो हम हमेशा निराश ही रहेंगे किसी काम में सफल नहीं हो पाएंगे इसीलिए जब खुद के व्यक्तित्व की बात आए तो हमेशा ज्यादा विचार नहीं करना चाहिए.

2.परफेक्ट बनने कि चाह आजकल की युवा पीढ़ी बहुत ज्यादा सिनेमा देखती है और वह जिंदगी को भी सिनेमा की तरह दिखती है उसे लगता है कि जो कुछ सिनेमा में होता है वह असल जिंदगी में भी होता है सिनेमा में जिस तरह हीरो के अंदर कोई भी कमी नहीं दिखाई जाती है वैसे ही वह इंसान भी अपने आप को हीरो मानता है और वह बाकी सब लोगों को पिक्चर के लोगों की तरह साइड आर्टिस्ट मानता है और चाहता है कि लोग उसकी तारीफ करें इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहता है और इसी वजह से वह बर्बाद होता रहता है कहीं ना कहीं उसकी तारीफ की चाह और खुद के परफेक्ट होने की गलतफहमी जब टूटती है तो बहुत परेशान करती है इसीलिए हमें कभी भी खुद को परफेक्ट नहीं मानना चाहिए और हमेशा अपनी गलतियों को  भूलाकर आगे बढ़ना चाहिए और ना ही कभी किसी से तारीफ की कोई उम्मीद रखनी चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति अपनी नजर में हीरो होता है क्योंकि सिनेमा केवल आप ही नहीं देखते हैं सभी देखते हैं.

3.अपने ऊपर काम का ज्यादा बोझ रखना ज्यादातर लोग दो तरह के ही होते हैं एक लोग भी होते हैं जो निकम्मे कामचोर होते हैं वह हमेशा काम से बचते रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों से भी भागते रहते हैं ऐसे इंसान भी किसी काम का नहीं होता है वह जिंदगी में कभी सफल नहीं हो पाता है और फिर दूसरी तरह के लोग आते हैं जो हमेशा अपने आप को हर तरह के काम से घेरे रहते हैं और हमेशा अपने आपको परेशान कर रहते हैं खुद को टॉर्चर करते रहते हैं और जिंदगी का बिल्कुल भी आनंद नहीं लेते हैं तो यह दूसरी कैटेगरी के लोग भी बेकार होते हैं जिंदगी में बैलेंस बनाकर चलना बहुत जरूरी होता है अगर आप बैलेंस नहीं बना पाओगे तो आप कभी भी जिंदगी को खुलकर नहीं जी पाओगे और आप हमेशा दुखी ही बने रहोगे तो आप जितना भी काम करो आपको उसके बदले सेलिब्रेट करना चाहिए और आपको उतना ही काम करना चाहिए जितना आप खुश होकर और अपने मन से करो क्योंकि काम करने में भी यह खुशी मिलती है और अगर आप कोई काम बे मन से करते हो तो वह काम करना बिल्कुल बेकार है उसका कोई फायदा नहीं होता है.

4.अपने आप को प्रोत्साहित ना करना ज्यादातर लोगों को हमेशा यही लगता रहता है कि उनमें कोई ना कोई कमी अवश्य है क्योंकि बे दूसरे लोगों की बातें इतनी ज्यादा सुनते रहते हैं कि वह अपने अंदर की अच्छाइयों को भुला देते हैं और अपने अंदर की नेगेटिव चीजों पर ही हमेशा ध्यान लगाए रहते हैं और जिसकी वजह से हमेशा अपने आप को कोसते रहते हैं और चाहे भी अगर कोई अच्छा काम भी कर लेते हैं तो उनके आसपास के लोग उन्हें हमेशा यही विश्वास दिलाए रहते हैं कि यह काम उन्होंने नहीं किया है यह काम धोखे से हो गया है जिसकी वजह से भी लोग हमेशा अपनी नजरों में गिरे रहते हैं और अपने आप से कभी कोई उम्मीद नहीं करते हैं जबकि वास्तविकता यह होती है कि हमें दूसरों से कभी कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए और अपनी उम्मीदों पर हमेशा खरे उतरना चाहिए.

5.बहुत जल्दी भ्रमित हो जाना बहुत से लोगों की समस्या होती है कि उनके जिंदगी का कोई लक्ष्य नहीं होता है जिसकी वजह से बे दूसरे लोगों को देखकर कोई भी काम पकड़ लेते हैं और फिर जब उन्हें उस काम में रस नहीं मिलता है और उस काम की जरूरत नहीं महसूस होती है तो फिर भी दूसरे क्षेत्र में मुड़ जाते हैं और जिंदगी भर इधर-उधर चक्कर लगाते रहते हैं और भ्रमित होते रहते हैं वे कभी भी कोई बढ़िया निर्णय नहीं ले पाते हैं क्योंकि वे कभी भी अपने दिमाग से काम नहीं लेते हैं वे हमेशा लोगों की बातें सुनते रहते हैं और बहकावे में आते रहते हैं और भ्रमित होते रहते हैं.

6.भावनाओं में बह जाना बहुत ज्यादा समस्या होती है कि आदमी अपने दिमाग से काम नहीं लेता है वह ज्यादातर अपने भावनाओं के बहकावे में चलकर निर्णय लेता है वह चाहता है कि कोई भी काम जिसे वह करना चाहता हो वह आज अभी और इसी वक्त हो जाए इसके लिए चाहे उसे कोई भी कीमत चुकानी पड़े तो वह जानवरों की तरह अपनी औकात से ज्यादा कोई भी काम करता रहता है फिर भी ज्यादातर लोगों को उनका लक्ष्य नहीं मिलता है क्योंकि भी दिमाग से काम नहीं कर रहे होते हैं आपको यह बात अच्छी तरह से समझ नहीं होगी कि आपको कोई भी चीज हासिल करने के लिए सबसे पहले तो बहुत ज्यादा धैर्य की जरूरत होगी साथ ही साथ आपको वहां पर सत्ता लानी होगी आपको 1 दिन में कुछ भी हासिल नहीं होने वाला आपको रोज लगातार उस क्षेत्र में अपने आप को लगाना होगा और साथ ही साथ अपने शरीर का और अपने दिमाग का भी पूरा ध्यान रखना होगा तब आपको सफलता 1 दिन में नहीं लेकिन एक दिन जरूर मिलेगी।

धन्यवाद 

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