गुस्सा कम करने के उपाय क्या हैं?

 


तो आज का प्रश्न है,

     कि गुस्सा कम करने के उपाय क्या है?

तो चलिए शुरू करते हैं तो सबसे पहले यह बताइए कि वास्तव में क्या प्रश्न यही है कि गुस्सा कम करने के उपाय क्या हैं या फिर केवल इस प्रश्न का उत्तर जान देने से आपकी सारी समस्याओं का हल हो जाएगा आप अगर थोड़ा सा ध्यान देंगे तो आपको पता चलेगा कि वास्तविक समस्या यह नहीं है कि गुस्सा कम करने के उपाय क्या हैं बल्कि यह समस्या तो उसी कारण के आसपास भी नहीं है जिसका आप समाधान ढूंढ रहे हैं,

तो और सोचिए,

चलिए कोई बात नहीं मैं बताता हूं मैं आपसे कुछ प्रश्न पूछता हूं और आप उनके सही जवाब अपने मन में ही दें,

क्या वास्तव में गुस्सा कम हो जाने से आपका अस्तित्व संकट में नहीं आ जाएगा आपने देखा होगा क्योंकि गुस्सा वास्तव में कोई ऐब नहीं है वह तो एक हथियार होता है जो प्रकृति हमें अपने बचाव के लिए देती है लेकिन हम अनजाने में उसका उपयोग अपने ही विनाश के लिए कर बैठते हैं,

 जब एक बच्चा जन्म लेता है तो जब वह छोटा ही होता है तो उसे भी आपने गुस्सा करते देखा होगा जबकि लोगों का मानना होता है की गुस्सा एक दुर्गुण है तो फिर वह छोटे से बच्चे में कैसे आया तो क्या वह वास्तव में दुर्गुण है? क्योंकि गुण और अवगुण तो इंसान में लोगों की संगति करने से ही आते हैं तो वह छोटा बच्चा किस की संगति करता है कि उसे इतनी छोटी उम्र में इतना भयंकर गुस्सा आने लगा।

 तीसरा और सबसे जरूरी प्रश्न यह है कि क्या वास्तव में गुस्सा कम करना जरूरी है या फिर गुस्से का सही इस्तेमाल करना जरूरी है?

 चलिए मैं आपको कुछ बातें बताता हूं-

सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा की गुस्सा आना कोई खराब बात नहीं है यह हमारी एक प्राकृतिक क्रिया है और यह जो प्राकृतिक क्रियाएं होती हैं जो ना तो अच्छी ही होती है और ना ही बुरी होती है ना ही इनको को उभारना अच्छी बात होती है और ना ही उनको दबाना। दोनों ही स्थितियों में यह हमारे लिए नुकसानदेह  साबित हो सकती हैं,

 तो फिर इसके लिए हमें क्या करना चाहिए?

 हमें इसका सही इस्तेमाल करना आना चाहिए अगर आपको गुस्से का सही इस्तेमाल करना आता है गुस्सा बाढ़ के पानी की तरह होता है जिसे काफी समय तक बांध बनाकर रोका नहीं जा सकता है क्योंकि अगर आप उसे बांध बनाकर रोकने की कोशिश करेंगे तो जैसे जैसे पानी बढ़ता जाएगा वैसे-वैसे बांध कमजोर होता जाएगा और एक समय ऐसा आएगा कि बांध टूट जाएगा और फिर वह बाढ़ का पानी भयानक तबाही मचाएगा वहीं दूसरी तरफ अगर इस बाढ़ के पानी को बहने दिया जाए तो यह वैसे ही तबाही मचा देगा और सब कुछ बर्बाद कर देगा आपको चारों तरफ उजड़े हुए घरों के अलावा कुछ नहीं दिखेगा तो अब आप समझ गए होंगे कि आपको क्या करना चाहिए अगर आप उस बाढ़ के पानी को सही रास्ता देंगे अगर उस पर जगह-जगह बैरियर लगाकर उसे मोड़ देंगे तो आप उस पानी का उपयोग अपने अनुसार अपने हित में कर सकते हैं जो कभी आपके लिए एक भयंकर आपदा बना हुआ था बिल्कुल ऐसा ही हमारा गुस्सा होता है अगर हम गुस्से को दबाने की कोशिश करेंगे तो शायद हम कुछ दिनों तक या कुछ महीनों तक अपने गुस्से को दबा कर रख सकते हैं लेकिन एक समय ऐसा आएगा कि जब दो स्थितियां बनेंगी की याद तो हम दब्बू और डरपोक हो जाएंगे हमारी कोई वैल्यू ही नहीं रहेगी क्योंकि जितना जरूरी विनम्र होना होता है उतना ही जरूरी रक्षात्मक होना होता है और दूसरी स्थिति में जब हम अपने गुस्से को दबा कर रखने मैं असमर्थ हो जाएंगे और फिर वह गुस्सा अपना पूरा रूप दिखाकर बाहर निकलेगा और चारों तरफ तबाही मचा देगा और दूसरी स्थिति में अगर हम अपने गुस्से पर अंकुश नहीं लगाते हैं तो यह वैसे ही चारों तरफ बाढ़ के पानी की तरह बेहतर रहेगा और आपका सब कुछ अपने साथ बहाकर ले जाएगा।

               गुस्सा क्या होता है?

 गुस्सा एक रक्षात्मक प्रक्रिया होती है यह तब बाहर आती है जब इंसान अपने आप को कमजोर समझता है तो वह अपने बचाव में इस तरह की प्रतिक्रियाएं देता है और यह रक्षात्मक प्रक्रिया कभी-कभी भावनाओं के बहाव में आकर हिंसात्मक प्रतिक्रिया में भी बदल जाती हैं अगर हम वास्तव में सही से अपना निरीक्षण करें तो गहराई में जाने पर हमें पता चलेगा कि गुस्सा हमें उसी स्थिति में आता है जब हमें लगता है कि हमें किसी से खतरा है हां वह खतरा किसी तरह का हो सकता है शायद हो सकता है कि आपको सामने वाले व्यक्ति से किसी तरह का डर हो और ज्यादातर यह डर अपनी इज्जत बचाने का ही होता है और जो कि बिल्कुल सही भी है लेकिन धीरे धीरे समस्या यह होती है कि हम यह निर्धारण नहीं कर पाते हैं कि क्या वास्तव में उस व्यक्ति से हमें डर है वह व्यक्ति हमारे लिए कोई खतरा है और इस तरह का निर्धारण ना कर पाने की स्थिति में ही हमें जरा जरा सी बातों पर क्रोध आता रहता है और हम गुस्सा की अग्नि में लगातार जलते रहते हैं।

          गुस्सा कितने प्रकार का होता है ?

वास्तविकता यह है कि अगर आपको इस प्रश्न का उत्तर पता हो तो काफी हद तक आप अपने गुस्से में सुधार कर सकते हैं और आप पता कर सकते हैं गुस्सा कितने प्रकार का होता है और हमें किस प्रकार दूसरे का चुनाव करना चाहिए मतलब कि हमारे लिए कौन सा गुस्सा सबसे खतरनाक साबित हो सकता है जिससे कि हमें बचना चाहिए और कौन सा गुस्सा हमारे लिए फायदेमंद साबित हो सकता है हमें जिसका चुनाव करना चाहिए और साथ ही साथ किस तरह का गुस्सा करने से हमें कोई फायदा नहीं होगा तो हमें उसका क्या कर देना चाहिए गुस्सा तीन तरह का होता है,

-सबसे पहला गुस्सा बहुत ही नीच किस्म का गुस्सा होता है यह गुस्सा बहुत तामसी होता है आपको अपने आसपास ऐसा गुस्सा करने वाले ही अधिकतर लोग मिलेंगे इस गुस्से की पहचान यह होती है कि यह गुस्सा हम उन व्यक्तियों पर ही करते हैं जो हमारा भला चाहते हैं जो हमारे  अपने होते हैं इस तरह के गुस्से का एक उदाहरण यह है कि अगर कोई व्यक्ति आपको नींद से जगाता है तो उस समय आपको इतनी भयंकर गुस्सा आती है जिसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं यह बहुत तामसी प्रवृत्ति का गुस्सा होता है तो आप को ध्यान देना चाहिए कि जब आपको ऐसा गुस्सा आए तो आपको समझदारी से इस गुस्से का दमन करना चाहिए।

-स्वार्थ ना पूरा होने का गुस्सा दूसरी तरह का गुस्सा होता है जब कोई व्यक्ति आपकी बात नहीं मानता है या फिर आपका नुकसान हो जाता है तो उस समय आपको जो गुस्सा आता है वह दूसरी प्रकृति का गुस्सा होता है यह गुस्सा भी लगभग तामसी प्रवृत्ति का ही होता है इस गुस्से का एक उदाहरण यह है कि जब आपको किसी व्यक्ति से बहुत ज्यादा उम्मीदें होती हैं और वह आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो आपको जो गुस्सा आती है यह वह गुस्सा होती है इसका दूसरा उदाहरण यह भी है कि आपने अपने आसपास पड़ोसियों में भी जरा जरा सी बात पर लड़ाई होते देखा होगा और सबसे सही उदाहरण तो इसका पति पत्नी भाई-बहन के बीच में होने वाली लड़ाई है तो आपको इस तरह के गुस्से से भी बचना चाहिए यहां पर मैं यह बिल्कुल नहीं कहना चाहता हूं कि आप मैं जो भी सोचा हो या चाहा हो वह आपको ना मिले बल्कि मैं केवल इतना बताना चाहता हूं कि वैसे तो आपको उस चीज के मिलने के मौके हो भी सकते हैं लेकिन अगर आप इस तरह का गुस्सा करेंगे तो आप जो चीज चाहते हैं वह आपको किसी कीमत पर नहीं मिलेगी तो हमें ऐसा गुस्सा भी नहीं करना चाहिए।

-यह गुस्सा बहुत कम लोगों को ही आता है जबकि इसकी वास्तव में सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में गुस्से का अभी एक बहुत बड़ा योगदान होता है लेकिन हम अपना गुस्सा अपने छोटी-छोटी बातों में ही निकालते रहते हैं और उसका कभी समझा नहीं कर पाते हैं और सही समय आने पर हमारे पास कुछ भी नहीं होता है गुस्सा एक हथियार की तरह होता है जिसका हम को सही समय पर इस्तेमाल करना आना चाहिए लेकिन ज्यादातर लोग उस हथियार का इस्तेमाल सिपाहियों पर ही कर देते हैं सही दुश्मन सामने आने पर वे अपना हथियार खो चुके होते हैं और फिर उस से मात खा जाते हैं गुस्सा अगर करना ही है तो भगत सिंह जैसा करना चाहिए कि विदेशी हुकूमत नहीं स्वीकार है तो नहीं स्वीकार है और उसके लिए असेंबली हॉल में बम फोड़ देंगे लेकिन जब ऐसा गुस्सा करने की बारी होती है तो ज्यादातर इंसान शांत रह जाते हैं।

 धन्यवाद

No comments:

Powered by Blogger.