क्या कम बोलने वाले लोग बेवकूफ होते हैं?




"अगर आपके पास बोलने के लिए कुछ ऐसा है जो चुप रहने से ज्यादा महत्वपूर्ण है तब ही आपको बोलना चाहिए वरना आपके लिए चुप रहना ज्यादा बेहतर है।"

आज की पोस्ट उन लोगों के लिए है जो लोग दूसरों से कम मतलब रखते हैं अगर आप भी उन लोगों में से ही हैं जो अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं और जिन्हें सामाजिक लोगों से  मिलना जुलना बिल्कुल पसंद नहीं होता है तो यह पोस्ट भी आपके लिए है तो सबसे पहले आप अपने आपसे एक सवाल पूछिए कि आपके कितने दोस्त हैं क्या आपके बहुत कम दोस्त हैं या फिर आपका सिर्फ एक दोस्त है या फिर आपका एक भी दोस्त नहीं है,

 अगर आप तो इनमें से किसी कैटेगरी में आते हैं तो आपके साथ दो संभावनाएं हो सकते हैं .......



..पहले संभावना तो यह होती है कि ज्यादातर लोग जो दूसरों से बात करना कम पसंद करते हैं वे कम सामाजिक और कमजोर टाइप के लोग होते हैं मतलब कि वे चाहते हुए भी अपनी बात दूसरों के सामने नहीं रख पाते हैं जिस वजह से यह लोग अपने आपको हमेशा कमजोर महसूस करते हैं और चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं और यह पूरी तरह से खुल नहीं पाते हैं और इनका सही तरह से विकास भी नहीं हो पाता है,


.. वहीं दूसरी संभावना इसके बिल्कुल विपरीत होती है और वह यह होती है कि अगर आप लोगों से घुलना मिलना और बातचीत करना कम पसंद करते हैं तू इस बात की भी बहुत ज्यादा संभावना होती है कि आप एवरेज लोगों की अपेक्षा एक ज्यादा बुद्धिमान इंसान है क्योंकि जो लोग ज्यादा स्मार्ट होते हैं तो वे लोग इस तरह के ही होते हैं इस बात से आप लोग भली-भांति सहमत भी होंगे कि जो लोग एवरेज लोगों से अलग होते हैं इसी वजह से एवरेज लोगों से अलग होते हैं क्योंकि उनकी आदतें आम लोगों जैसी नहीं होती हैं ।

     यहां पर खुशी की बात यह है कि यह जरूरी नहीं है कि आप पैदाइशी ही स्मार्ट हो या बुद्धिमान हो आप ऐसे लोगों की आदतों को कॉपी कर सकते हैं और अपने व्यक्तित्व में पेस्ट कर सकते हैं और ऐसी आदतों को अपनाकर आप भी ऐसे लोगों की तरह या फिर इनसे अच्छी तरह अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं फिलहाल तो आज हम लोग कम बोलने वाले लोगों के बारे में ही बात करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं ,


        कम बोलने वाले लोगों की विशेषताएं

१. कम बोलने वाले लोगों की एक विशेषता यह होती है कि यह लोग अनावश्यक झगड़ों से हमेशा बचे रहते हैं और जब बहुत ही जरूरी बात हो जाती है या जब समस्या बहुत ही बड़ी हो जाती है तब ही यह लोग कोई रिएक्ट करते हैं बढ़ना यह लोग छोटी-मोटी समस्याओं को चुप रहकर ही खत्म कर देते हैं।

२. अगर आप में कम बोलने की आदत है तो आप ज्यादातर समय अपने ऊपर ध्यान देने में निकाल सकते हैं जैसे आप का विकास ज्यादा होगा और आपके पास सोचने के लिए पर्याप्त समय होगा  ।

३.अगर आप किसी से बात करते समय बोलते कम और सुनते ज्यादा हैं तो आपको वह चीज भी सुनने को मिलेगी जो आपको पता नहीं है और अगर आप किसी से बात करते समय केवल बोलते ही हैं तो आपको उसी चीज को दोबारा बोल रहे होंगे जो आपको पहले से पता है तो उसका कोई खास फायदा नहीं होगा ।

४.कम बोलने का एक फायदा यह भी है कि वह व्यक्ति जिससे आप बातचीत कर रहे हैं कभी आपके बारे में सही जानकारी हासिल नहीं कर सकता है जिससे कि वह हमेशा आपको जानने के लिए उत्सुक रहेगा और आपकी तरफ आकर्षित होता रहेगा।

५. कम बोलने का एक फायदा यह भी है कि अगर आप कम बोलते हैं तो जो आपक कमजोरियां होंगे वह दूसरों के आगे छिपी रहेंगी अब आप कहेंगे इसका फायदा क्या है तो इसका फायदा यह है कि अगर आप की कमजोरियां दूसरों को पता नहीं चलती हैं तो वे कभी इसका फायदा नहीं उठा पाएंगे   ।

६.बोलते समय क्या होता है कि हमारा दिमाग उस व्यक्ति के बारे में सोचना शुरु कर देता है हम जिस से बात कर रहे होते हैं और यह बात बिल्कुल सोचना बंद कर देता है कि  हम क्या बोले जा रहे हैं क्या यह हमारे लिए नुकसानदेह है या फायदेमंद वे लोग बहुत अलग होते हैं जो बोलते समय दोनों तरफ की चीजों को ध्यान में रखते हैं कि वे जो बात बोल रहे हो उससे दूसरे को भी नुकसान ना हो और मैं अपना भी नुकसान ना कर ले इसीलिए आपने देखा होगा कि आप ज्यादातर वे सब बातें बोल देते हैं जिनके बारे में आपने कभी सोचा नहीं होता है और फिर आप बाद में बहुत पछता रहे होते हैं यह सब इसी कारण होता है

             

                कम बोलने का कारण 

    तो अब मैं आपको यह भी बताऊंगा साथ ही साथ में की लोग कम बोलने का चुनाव क्यों करते हैं या फिर भी ऐसा कैसे कर लेते हैं क्योंकि जिस स्थिति में आप होंगे शायद आपको ऐसा ही सोच रहे होंगे कि दुनिया में अगर सबसे कठिन कोई काम है तो शायद वही यही है कि दूसरे की बात सुनकर चुप रह जाना या फिर कोई  रिएक्ट ना करना तो बहुत से लोग ऐसे कैसे होते हैं जो आसानी से यह कर लेते हैं ,

              ..कुछ लोग तो ऐसे ही होते हैं जो शुरू से ही कम बोलने वाले आदत के होते हैं अर्थात उनकी बचपन से ही ऐसी आदत होती है कि उन्हें कम बोलना ही पसंद होता है तो उनकी बात तो नहीं ही करेंगे।

 लेकिन ज्यादातर बहुत कम बोलने वाले लोगों के साथ ऐसा होता है कि वे किसी समय बहुत ज्यादा बोलने वाले होते हैं और उन्हें इस बात पर का पता अच्छी तरह से होता है कि ज्यादा बोलने के कितने सारे नुकसान हैं और जिंदगी के किसी पल में उनके साथ ऐसा होता है कि वे ना चाहते हुए भी चुप रह जाते हैं और बर्दाश्त कर लेते हैं जिसका उनको कुछ समय के बाद फायदा देखने को मिलता है क्योंकि मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ है तो मैं रिएक्ट करने की जगह चुप रहने के फायदों को महसूस करके बहुत ज्यादा आश्चर्यचकित हुआ हूं और जिस वजह से मैं उसकी तरफ आकर्षित हुआ हूं,

 तो विश्वास मानिए अगर आप भी अपने अंदर अकेले रहने की और चुप रहने की आदत को विकसित करना चाहते हैं तो आपको करना कुछ नहीं है बस आपको एक कदम एक कदम बढ़ाना होगा आप बहुत ही जल्दी अपने अंदर इस आदत का विकास कर लेंगे और इसके फायदे जब आप महसूस करेंगे तभी आपको वास्तव में पता चलेंगे ।

धन्यवाद

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