लोग तुम्हें दबाते क्यों हैं?

 


बहुत सारे लोगों की या लगभग अधिकतर लोगों की यह समस्या रहती है कि कोई भी इंसान उनसे कुछ भी कह देता है और भी उसका कोई जवाब नहीं देते हैं और भी ना चाहते हुए भी उसकी किसी भी बात को बर्दाश्त कर लेते हैं तो ऐसा उनके साथ क्यों होता है और इससे संबंधित और भी कई सवाल,

तो आज की पोस्ट में मैं आपसे इस बारे में ही बात करूंगा कि लोग आपको कुछ भी कैसे कह देते हैं और आपसे जबरदस्ती अपनी बात कैसे मनवा लेते हैं तो चलिए शुरू करते हैं अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिनसे सभी लोग हमेशा परेशान रहते हैं और घर वाले भी हमेशा बुरा भला कहते रहते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए है सबसे पहले मैं कुछ ऐसी समस्याओं के बारे में बात करूंगा जो मेरे साथ पहले आती थी और आशा है कि आप इन सारी चीजों को अपने आप से रिलेट कर पाएंगे क्योंकि जब तक आप को पता नहीं होगा कि आप की सारी समस्याएं क्या हैं तब तक आप उन्हें सॉल्व नहीं कर सकते हैं तू मैं यहां पर कुछ समस्याएं रखने जा रहा हूं जिनको समझकर आप आगे का अंदाजा खुद भी लगा सकते हैं और आखिर में मैं इन सभी समस्याओं का सॉल्यूशन बताऊंगा लगभग सभी समस्याओं का सॉल्यूशन एक ही है,

 1.माता पिता चाहते हैं कि आप उनके अनुसार चलें ,

2.आपके दोस्त या पड़ोसी आपका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर लेते हैं ।

 3.आपका छोटा भाई या दोस्त आपको कुछ भी कह देते हैं।

 4.आपके रिश्तेदार आपकी बहुत बेइज्जती करते हैं ।

5.समाज में लोग आपको देखकर आप को छेड़ते हैं या आप पर हंसते हैं।

6.आपकी कोई गर्लफ्रेंड/boyfriend  नहीं है या है (वह बात अलग है कि आप रखना नहीं चाहते) वह आपको अपने हिसाब से चलाने के लिए फोर्स करती/करताहै।

7.लोग हमेशा आपका भरोसा तोड़ते हैं ।

8.आपके दोस्त हमेशा आपको भी मजाक का पात्र बनाते हैं।

9. आपको अपने निर्णय लेने में कठिनाई आती है ।

              

                    लोगों के दबाने का कारण 

अब मैंने ऊपर समस्याओं के बारे में तो बात कर ही ली है और आपने समस्याओं को अपने आप से अच्छी तरह से रिलेट कर लिया होगा मुझे आशा है कि आप लोगों के जीवन में बिल्कुल यही समस्याएं आती होंगी तो चलिए अब इन के पीछे के कारण की भी बात कर लेते हैं दरअसल लोग आपको तभी दबाते हैं जब उनको पता होता है कि आप दब जाएंगे आपने अक्सर देखा होगा की जो कमजोर होता है उसी पर अत्याचार किए जाते हैं तो यही सबसे बड़ा कारण है की गलती आपकी है कमजोरी आपकी है आपने लोगों के सामने अपनी छवि ऐसी बना रखी है कि आप से कोई कुछ भी कह कर जा सकता है और फिर आप भावनात्मक रूप से आहत हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि क्या आप वास्तव में इतने गलत हैं ,

माता पिता के क्षेत्र में आप यही सोचते होंगे की कहीं आप उनसे कुछ कह देंगे तो वे हर्ट हो जाएंगे या फिर कहीं लोग आपसे गुस्सा ना हो जाए आपके मन में इसी तरह के हीनता से भरे विचार आते रहते होंगे।


                     समस्या का निवारण

 अब आपने समस्याओं के बारे में भी जान लिया है और समस्याओं के कारण के बारे में भी जान लिया है आपकी मन की दशा भी बिल्कुल जैसा मैंने ऊपर बताया है वैसे ही होगी या उसके आसपास ही होगी आप उसको अपने आप से रिलेट कर सकते हैं तो अब मैं आपको इन सब समस्याओं के सॉल्यूशन के बारे में बताने जा रहा हूं,

 यहां पर मैं कुछ कड़वे शब्दों का भी प्रयोग कर सकता हूं तो मैं आप सब लोगों से पहले ही माफी मांगता हूं लेकिन क्या करूं भाई यह जरूरी है इसके बिना आप के व्यक्तित्व में सुधार होना मुश्किल है,

तो सबसे पहले तो आप मुझे यह बताइए की आपने क्या ठेका ले रखा है सब की खुशियों का। आपको सबसे पहले अपनी खुशियों के बारे में सोचना चाहिए अगर आप खुद खुश नहीं रह सकते हैं तो आप लोगों को किसी कीमत पर खुश नहीं रख सकते हैं क्योंकि कोई भी इंसान वही चीज बांट सकता है जो चीज उसके पास होती है अगर आपके पास दुख होंगे तो आप कितना भी चाहे दुख ही बांटते फिरेंगे तो सबसे पहले तो आपको सबसे ऊपर अपने आप को रखना है।

                 

                       आत्मसम्मान

अपने आत्मसम्मान को  सबसे आगे रखना है चाहे वे आपके माता-पिता ही क्यों ना हो जहां पर आप के आत्मसम्मान को चोट पहुंच रही हो वहां पर आपको उन लोगों को भी सीमित कर देना होगा अगर आप उन लोगों से बहस नहीं करेंगे और उनको चुप नहीं करेंगे तो  वे आपको कुछ भी बोलेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि सामने जो बंदा बैठा है वह कुछ नहीं बोलेगा और जब सामने वाला व्यक्ति कुछ नहीं बोलता है तो सुनाने वाले के बोलने की कोई सीमा नहीं रहती है फिर वह ऐसी ऐसी बातें भी बोलता है जो उसे नहीं बोलनी चाहिए,

"तो सबसे पहले तो आपको अपना ब्रांड ही सुधारना होगा किसी की औकात नहीं होनी चाहिए आपसे फालतू की बात करने की सबसे पहली शर्म तो आपको वहीं पर आ जानी चाहिए जब कोई इंसान आपको बिना वजह सलाह देता है या फिर आपके मसलों में हस्तक्षेप करता है क्योंकि किसी भी इंसान में इतनी हिम्मत नहीं होती है कि जब तक आप उसे ऐसे सिग्नल ना दें कि आप उसकी मदद चाहते हैं या फिर आप उसे ग्रीन कार्ड ना दिखाएं तब तक वह आपके मसलों के बीच में आ जाए।"

 तो कहीं ना कहीं गलती आपकी ही है आपने अपने आप को इतना कमजोर बना के रखा है और अगर इस प्रक्रिया में आपके अपने या फिर कोई भी हर्ट होता है तो होने दो।आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए आप एक तरह से उन पर एहसान कर रहे हो की उनकी बे फालतू की अपेक्षाओं को और इन आदतों को तोड़ रहे हो और जब लोगों की बेकार की उम्मीदें टूटती है तो दर्द तो होता ही है तो आपको बिल्कुल भी इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है।

 आपको अपनी कुछ बाउंड्रीज बनाकर चलना चाहिए जिसके अंदर आप किसी का हस्तक्षेप बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और अगर कोई ऐसा करता है तो आपको उससे कुछ भी कहने का कोई फायदा नहीं है आपको अपने अंदर ही झांकना चाहिए कि आप में क्या कमी रह गई जो उस इंसान की इतनी औकात हो गई की उसने आपसे ऐसी बात कह दी।

आपको अपना व्यक्तित्व ऐसा बना कर रखना चाहिए कि आप चाहे गलत हो या सही हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता सामने वाले व्यक्ति की हिम्मत नहीं होनी चाहिए कि आप में कमी निकालें।

 धन्यवाद

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