शर्म को खत्म करने के कुछ तरीके।




मानव जिंदगी बहुत सारी चीजों का संगम होती है बहुत सी आदतें होती हैं जब यह सब साथ में मिलकर चलती है तब ही हम एक अच्छी और आनंददायक जिंदगी जी सकते हैं,
            
                                    - मैं लगातार कोशिश कर रहा हूं कि मैं अधिकतर चीजों पर और आदतों के विकास पर पोस्ट लिख सकूं तो अच्छी आदतों की इन्हीं श्रेणी में आज मैं आत्मविश्वास को बढ़ाने के बारे में बात करूंगा और शर्म को खत्म करने के कुछ तरीकों  के बारे में बात करूंगा,

 अगर आत्मविश्वास को बढ़ाने की बात की जाए तो बहुत से लोग बहुत से तरीके बताते हैं जैसे कुछ लोगों का मानना होता है कि अगर आप आज विश्वास बढ़ाना चाहते हो तो आप को अंदर से मजबूत ही लानी होगी,आपको कंधे सीधे करके चलना चाहिए कंधे झुका  कर नहीं चलना चाहिए और भी पता नहीं क्या क्या आप लोगों ने भी ऐसी ही कई बातें सुनी होंगी,
 लेकिन अगर वास्तव में देखा जाए तो वह आत्मविश्वास बढ़ाने के नहीं बल्कि आत्मविश्वास से भरे होने के बाहरी फैक्टर है मतलब आप इन कामों के जरिए अपने आप क आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखा सकते हैं लेकिन अगर आप वास्तव में चाहते हैं कि अंदर से आत्मविश्वास कैसे आए क्योंकि अगर वह हो गया तो यह सब भी अपने आप ही हो जाएगा इसीलिए आज की पोस्ट में आपको मैं जिन तरीकों के बारे में बताऊंगा बे बिल्कुल प्रैक्टिकल पर आधारित हैं और आप को उनको इस्तेमाल करने के बाद अवश्य फायदा मिलेगा तो चलिए शुरू करते हैं,


   Understand the wrong perception about the confidence 

 जब आप लोगों से किसी आत्मविश्वास से भरे हुए इंसान के बारे में सोचने के लिए कहा जाए तो आप लोगों मैं से ज्यादातर के दिमाग में किसी ऐसे इंसान की ही फोटो आएगी जो देखने में काफी हैंडसम हो और जो एक अच्छा खासा बिजनेस मैन या फिर मॉडल हो मतलब कि उसके पास पैसे की भी कोई कमी ना हो साथ ही साथ उसकी बॉडी भी काफी अच्छी हो मतलब ओवरऑल पर्सनालिटी भी उसकी काफी अच्छी हो जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होता है अगर आप अपने अंदर वास्तव में कॉन्फिडेंस लाना चाहते हैं तो आपको वास्तव में इस नजरिए को बदलना होगा कि पैसे फेम और बाहरी चीजों से कॉन्फिडेंस आता है कॉन्फिडेंस हमारी एक अंदर की फीलिंग होती है आपने ऐसे बहुत से लोग देखे होंगे या फिर ऐसे बहुत से बड़े लोगों का इंटरव्यू सुना होगा जो वास्तव जीवन में देखने में तो बहुत सफल होते हैं और उनके पास पैसे की भी कोई कमी नहीं होती है लेकिन वे अपने इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्हें किस तरह पूरी जिंदगी लो कॉन्फिडेंस की समस्या से लड़ना पड़ा या फिर और किसी समस्या से परेशान रहना पड़ा जबकि अगर आपके नजरिए के अनुसार देखा जाए तो उनके पास तो किसी चीज की कमी नहीं थी उन्हें ऐसी कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और आपने अपने आसपास ऐसे बहुत से गरीब तबके के लोग देखे होंगे जिनके पास पहनने के लिए सही कपड़े तक नहीं होंगे और उनका कॉन्फिडेंस का लेवल भरपूर होगा तो अब आप समझ गए होंगे कि कॉन्फिडेंस का पैसे से और बाहरी चीजों से कोई संबंध नहीं है अगले पॉइंट में मैं आपको बताऊंगा कि कॉन्फिडेंस बढ़ाए कैसे जाए?


    You have to prove something to urself 

  हमारा दिमाग पूरी तरह से विश्वास पर काम करता है अगर हमें किसी चीज का विश्वास हो जाता है कि हम वह काम कर सकते हैं तो फिर हम वह काम बहुत आसानी से कर जाते हैं और अगर हमें किसी चीज का विश्वास नहीं होता है तू वह चाहे काम कितना भी आसान हो हम उस में चूक कर ही जाते हैं आपको आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए लोकस कंट्रोल के सिद्धांतों को समझना होगा लोकस कंट्रोल का अर्थ होता है कि आप क्या मानते हैं कि आपके जीवन में आने वाले सारे चीजों का कारण क्या है क्या वह कारण बाहरी है या फिर उन सब का कारण आपके भीतर है तू इस आधार पर लोगों को दो भागों में बांटा जाता है,
       
 
                  Internal locus of control 


 इस विभाग के लोगों का मानना होता है कि उनके जीवन में जो भी समस्याएं आती है या फिर उनके जिंदगी की सभी कार्यों पर उनका अधिकार होता है और उनके जिंदगी में उन्हें जो कुछ भी मिलता है वह सब उनके किए हुए कामों का ही फल होता है अगर उनके साथ अच्छा होता है तो उन्होंने किसी के साथ कुछ अच्छा किया होता है या फिर उन्होंने इसके लिए कोई कीमत चुकाई होती है उनके अनुसार दुनिया एक आईना होती है आप उसमें जैसा देखेंगे आपको वैसा ही मिलेगा इसीलिए यह लोग ज्यादातर समय खुश रहते हैं और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।
  
       
                 External locus of control 

कुछ लोगों का मानना होता है कि उनके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है उस पर उनका कोई अधिकार नहीं है उनके जीवन में कोई भी चीज स्पष्ट नहीं होती है बे हमेशा यही मानते रहते हैं कि वे बहुत दुखी है और सारी दुनिया की समस्याएं भगवान ने उन्हीं की जिंदगी में डाल दी हैं और इस समय भगवान की गलती है या फिर उनके किस्मत का दोष है उनकी किस्मत ही खराब है और 1 दिन कोई ऐसा चमत्कार होगा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा इस तरह के लोग अपने जीवन की समस्याओं के लिए बाहरी चीजों को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं और हमेशा दुख से भरे हुए निराश और शर्मिंदगी से भरे हुए रहते हैं।

 
          
              we all are just human beings

   अगर आपको स्टेज पर बोलने के लिए कहा जाए मतलब कि आपको कहा जाए कि आपको कहां जाए कि आपको बहुत सारे लोगों के सामने बोलना है या कोई भाषण देना है तो हो सकता है कि आप बोल लो अगर आपको ने पहले कई बार ऐसा किया है लेकिन अगर आपने पहले कभी भी भाषण नहीं दिया है तो आपको बोलने में बहुत समस्या आएगी या हो सकता है कि आप बोल ही ना पाए तू इस समय में आपको ज्यादा कुछ सोचने की जरूरत नहीं है आपको बस इतना अपने दिमाग में रखना है कि आप जिन लोगों के सामने बोल रहे हैं बे वास्तव में सब इंसान ही है और सब आपके जैसे ही हैं उनमें एक अकेला इंसान भी आपसे अलग नहीं है जैसे विचार और भावनाएं आपके अंदर चल रहे हैं बिल्कुल वही सब उनके अंदर भी चल रहा है आपसे भी किसी तरह से अलग नहीं है तो फिर आपको उनसे क्या समस्या है जो आप उनके सामने नहीं बोल पा रहे हैं चाहे कोई भी इंसान कितना भी सफल क्यों ना हो लेकिन वह तब भी रहता इंसान ही है और उसके अंदर भी सभी भावनाएं होती है वह तब भी छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो सकता है और खुश हो सकता है तो आपको इतना ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है कि आप जिसके सामने बोल रहे हैं वह कोई दूसरे ग्रह से आया हुआ है या कोई जानवर है जिससे आपक खतरा है और आपको उससे डरने की जरूरत है।

       
           Practice the power of experience 

अब अगली बार आती है कि अगर कोई इंसान आपसे कहता है कि वह आपके अंदर आत्मविश्वास ला देगा और आप पहली बार में ही बहुत ज्यादा आत्मविश्वास से भर जाएंगे जब आप पहली बार ही कोई काम करेंगे तो आत्मविश्वास बहुत भरपूर तरह से झलक रहा होगा तो  आपको कुछ नहीं केवल पागल बना रहा है और शायद वह आपसे कोई अपना स्वार्थ साधना चाहता है इसीलिए आपको कुछ समय के लिए आशा देना चाहता है आपको समझना होगा कि जब आप सफलता की राह पर चलना शुरू करते हैं तो आप सबसे आखिरी सीढ़ी पर सबसे पहले कदम नहीं रख सकते हैं आपको सबसे पहले सबसे पहली शिर्डी पर कदम रखना होता है और फिर आप धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाते जाते हैं और आप एक दिन आखरी सीढ़ी पर भी पहुंच तक जाते हैं लेकिन इस सब यात्रा में छोटी मोटी दुर्घटना भी हो सकती है आपका पैर भी फिसल सकता है आप 2 सीढ़ी नीचे भी आ सकते हैं तो यह सब आम बात है लेकिन यह जरूर तय है कि अगर आप चलते रहेंगे तो आप एक दिन जरूर पहुंच जाएंगे मगर अगर आप सोचे कि आप सीधे आखिरी सीढ़ी पर पहुंच जाएं तो यह आपकी बेवकूफी के अलावा और कुछ नहीं होगी और इस दौरान आप गंभीर चोट भी खा सकते हैं तू अगर आपको छोटी मोटी चोट भी लगती है और अगर थोड़ा सा समय लगता है तो इसमें सोचने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह तो होगा ही तभी आप आगे बढ़ सकते हैं तो आपको आत्मवश्वास से भरने के लिए लगातार कोशिश करती रहना होगा।
      
     
                  Don't take too seriously

  ऊपर वाले पॉइंट में मैंने बात की थी कि आपको लगातार कोशिश करती रहनी होगी आप लगातार कोशिश कर रहे हैं तो आप सफल हो जाएंगे लेकिन आपको इस दौरान कई बार कुछ इस तरह की समस्याओं का सामना करना होगा कि आप मानसिक रूप से भी परेशान हो सकते हैं अगर आप अपने आप में आत्मविश्वास लाना चाहते हैं तो आपको भावनाओं पर विजय पानी होगी मतलब कि आपको छोटी-छोटी बहुत सी चीजों को इग्नोर करना होगा बे आपके मतलब की ही नहीं है जैसे कि अगर आप से कोई कुछ कह देता है तो आपको उस बात को दिल से नहीं लगाना होगा और लोग आपसे पता नहीं क्या क्या कहेंगे आपको उन सब को छोड़कर आगे बढ़ते रहना होगा इतना भी जरूरी नहीं है कि आप उनके बारे में यह भी सोचे कि उन्होंने यह कहा तो क्यों कहा इस तरह की मानसिकता आपको रखनी होगी आपको अपने ऊपर पूरा भरोसा रखना होगा तभी आप आत्मविश्वास से भरे होंगे अगर कोई आप में कोई कमी निकालता है तो आपको उस कमी को सुधारने की बजाए उसे स्वीकार करने में और उस कमी के साथ खुश रहने का एटीट्यूड दिखाना होगा यह होता है असली कॉन्फिडेंस जैसे कि अगर आप मोटे हैं और कोई आपसे कहता है कि तू तो मोटा है तो आपको उससे कहना चाहिए अरे भाई तूने सही से देखा ही नहीं मैं तो तूने जितना देखा है उससे भी ज्यादा मोटा हूं या फिर अगर आप की शक्ल किसी को ठीक नहीं लगती है तो कोई आपसे कहता है कि तू देखने में ऐसा है या वैसा है तो आपको उसकी तरफ और मुंह टेढ़ा करके कहना चाहिए कि देख भाई तूने सही से नहीं देखा मैं तो ऐसा हूं,
 तो?

 धन्यवाद

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