दूसरों से तुलना करने की समस्या खत्म।

 



आज की पोस्ट में हम इस बात पर बात करेंगे कि हम अपनी तुलना दूसरों से क्यों करते हैं और ज्यादातर लोगों की यही समस्या होती है कि ना चाहते हुए भी अपनी तुलना दूसरों से करते रहते हैं और अपने आपको हमेशा परेशान रखते हैं और निराश होते रहते हैं अगर आप भी उन लोगों में से ही एक हो तो यह पोस्ट आपके लिए है तो सबसे पहले तो आपको अगर इस समस्या का इलाज ढूंढना है तो इस समस्या का कारण ढूंढना होगा क्योंकि किसी भी समस्या का समाधान ढूंढने से पहले जरूरी होता है कि हम उसकी जड़ तक पहुंचे अगर आप उसकी जड़ तक आसानी से पहुंच जाएंगे तो आप उस समस्या को जड़ से ही मिटा देंगे जिससे कि वह समस्या दोबारा पनपेगी ही नहीं ,

आपने पहले भी बहुत सी पोस्ट पढ़ी होंगी लेकिन आप इस समस्या से छुटकारा नहीं पा पाए होंगे तभी आप हमारी पोस्ट पर आए हैं विश्वास मानिए अगर आप हमारी पोस्ट में दी हुई सलाह को मानेंगे तो आप 100% इस प्रकार की समस्या से निजात पा पाएंगे और अगर आप हमारी बताई हुई बातों पर चलेंगे तो आप कभी भी अपने आप को इस कारण की वजह से निराश नहीं करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं ,

           

                  दूसरों से तुलना करने का कारण 

प सभी लोग अभिमान से भलीभांति परिचित होंगे और यह अभिमान हम सभी के मन में होता है और यह हमारे मन को इस तरह से प्रेरित करता है जिससे कि हमारा मन और विचारों के बारे में सोचें जिससे हमारा अभिमान बड़े और फल स्वरुप हमें खुशी मिलती है जब हमारे अभिमान को बढ़ावा मिलता है लेकिन क्योंकि हमारा मन इतना समझदार नहीं होता है कि वह इस छोटे से फायदे की वजह से भविष्य के नुकसान देख पाए वह हमारे अभिमान की बातों में आ जाता है और इसी तरह के कुछ विचार सोचने लगता है,

              

                     ध्यान देने वाली बात

 अब आप सोच रहे होंगे कि दूसरों से तुलना करने में हमारा अभिमान किस तरह से बढ़ता है उल्टा इससे तो हमारा आत्मविश्वास गिरता है तो आपको मैं बता दूं कि आप को या तो पूरी समस्या के बारे में जानकारी नहीं है या फिर आप पूरी समस्या बताना नहीं चाहते हैं क्या है पूरी समस्या आप केवल इस समस्या को बता रहे हैं कि जब आप अपने आप की तुलना किसी दूसरे से या अपने से श्रेष्ठ से करते हैं तो आपको मानसिक क्षति पहुंचती है और आपको बहुत दुख पहुंचता है आपका आत्मविश्वास बिल्कुल हिल जाता है लेकिन आप उस बात को क्यों नहीं बता रहे हैं जब आप अपनी तुलना अपने से कमजोर से करते हैं या आप की तुलना जब कोई आप से कमजोर इंसान से करता है और आपको जो तारीफें सुनने को मिलती हैं उसको सुनने में जो आपको खुशी मिलती है आप यहां पर उस खुशी के बारे में क्यों नहीं बता रहे हैं आप केवल उस दुखों के बारे में ही क्यों बता रहे हैं तो अब आप भली-भांति समझ गए होंगे कि क्या कारण है अगर आप अभी नहीं समझे हैं तो आपको थोड़ा सा और विस्तार में बताता हूं वास्तविक कारण यह है कि अगर आपको केवल यही आदत छोड़ आनी है कि आप अपनी तुलना किसी अपने से श्रेष्ठ से ना करें तो आप यह अपनी आदत कभी नहीं छुड़ा सकते हैं आपको साथ ही साथ वह आदत भी बदलनी होगी कि आप अपनी तुलना अपने से कमजोर से भी ना करें अगर आप तारीफ सुनने की आदत रखते हैं तो आपको अपनी बुराइयां भी सुननी होंगी और अपनी कमजोरियां भी सुन नहीं होंगी भले ही भी आपकी कमजोरियां ना हो तो अब आप समझ ही गए होंगे कि आपको क्या करना है आपको अपनी तुलना अपने से कमजोर से करने की आदत को छोड़ना है आपकी अपने आप ही छूट जाएगी।


                     आगे क्या करना है ?

अब आप पहले तरीका तो समझ ही गए होंगे कि आपको वास्तव में करना क्या है और आपको इसके साथ ही साथ यह बात भी हमेशा ध्यान में रखनी है की तुलना करना गलत बात नहीं है लेकिन यह बात बिल्कुल गलत है कि आप अपनी तुलना कर किससे रहे हैं अगर आप थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो आप अपनी तुलना अपने आसपास में रहने वाले उन लोगों से कर रहे हैं जो कभी आप से थोड़ा आगे होते हैं तो वे ही लोग कभी आपसे थोड़ा पीछे हो जाते हैं और आप भी उसी चूहा दौड़ में हमेशा फंसे रहते हैं और आप इस जाल को नहीं देख पाते हैं कि वास्तव में मुद्दा इतना बड़ा नहीं है जितना आप ने बना रखा है और इन सब चीजों में फंसकर आप अपनी कभी भी वास्तविक उन्नति कर ही नहीं पाएंगे अगर आपको तुलना करनी ही है तो आप अपनी तुलना महापुरुषों से कीजिए तो आप में वास्तव में सुधार होगा और आप अपने आप ही लोगों से श्रेष्ठ होते चले जाएंगे लेकिन उनसे तुलना करना आपको बहुत कठिन काम लगता है तू अगर आप वास्तव में अपने व्यक्तित्व को लेकर चिंतित हैं और अपने आप में सुधार चाहते हैं तो आप अपनी तुलना अपने आसपास के लोगों से करना छोड़ कर महापुरुषों से करना शुरू कर दीजिए और ऐसे लोगों से करना शुरू कर दीजिए जिन्होंने वास्तव में जिंदगी में कुछ किया है।

 धन्यवाद 

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